किसी से गलती होने पर उसे डांटने के बजाय सहानुभूति और दिलासा दें

किसी से गलती होने पर उसे डांटने के बजाय सहानुभूति और दिलासा दें

इन्सान गलतियों का पुतला है। ऐसा कोई भी नहीं है जो कभी गलती ना करता हो। कभी ना कभी सभी गलतियाँ करते हैं। अगर हम गलतियों की असली वजह जाने बिना एक दूसरे पर आरोप, इल्जाम लगाते हैं या गलती करने वाले को डांटते, धमकाते हैं या कोई सजा देते है तो इससे परिस्थितियां और ज्यादा बिगड़ जाती हैं। लेकिन अगर हम गलती करने वाले को दिलासा देते हैं उसके साथ सहानुभूति रखते हैं तो बहुत बड़े नुकसान से बचा जा सकता है।

sympathy, console

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आईये इस कहानी से इस बात को समझते हैं।

एक शहर में एक couple (पति-पत्नि) हँसी ख़ुशी रह रहा था। उन दोनों में काफी प्यार था। उनके एक 2 साल का बेटा था। एक दिन पति ऑफिस जाने के लिए काफी late हो रहा था। जल्दबाजी में तैयार होकर ऑफिस के लिए निकलने लगा तो उसने देखा कि एक कीटनाशक (Insecticide) की बोतल खुली हुई रखी है। उसने जल्दबाजी में निकलते हुए अपनी पत्नि से उस बोतल को ढक्कन लगाकर बच्चे की पहुँच से दूर रखने के लिए कहा और चला गया। पत्नि रसोई के काम में लगी हुई थी इसलिए वो यह बात पूरी तरह से भूल गयी।

बच्चे ने वो बोतल देखी और खेलने के इरादे से उस बोतल के पास गया।  खेलते खेलते कुछ कीटनाशक बच्चे के मुँह में चला गया। जिससे बच्चे की तबियत बिगड़ गयी और वो बेहोश हो गया। पत्नि को अचानक बच्चे का ध्यान आया तो वह kitchen से बाहर आई। बच्चे को देखते ही उसके पैरों के तले से जमीन खिसक गयी। वह बहुत ज्यादा डर गयी। वह अपने आप को सँभालते हुए तुरंत बच्चे को लेकर हॉस्पिटल गयी। हॉस्पिटल पहुँचते ही वो महिला बिल्कुल बदहवास सी हो गयी और तरह तरह के नकारात्मक ख्याल उसके मन में आने लगे।  वह बहुत ज्यादा डर गयी कि वह आज अपनी गलती से अपने बच्चे को खो देगी। और अगर बच्चे को कुछ हो गया तो वह अपने पति का सामना कैसे करेगी? वह इतनी ज्यादा tension में आ गयी कि वह कुछ बोल ही नहीं पा रही थी। तब हॉस्पिटल वालों ने उसके पति को बुलवाया। पति भी बदहवास सा दौड़ता हुआ hospital पहुँचा। पति को देखते ही वह महिला दहाड़ मारकर रोने लगी। पति डॉक्टर्स से मिला और बच्चे के बारे में पूछा। डॉक्टर ने जवाब दिया कि अभी बच्चे की हालत बहुत गंभीर है कुछ नहीं कहा जा सकता। हम अपनी और से पूरी कोशिश कर रहे हैं। आप ईश्वर से दुआ करें और बाहर इंतजार करें।

इसके बाद वह अपनी पत्नि के पास गया। पति को देखते ही पत्नि और ज्यादा डर गयी और अपने मन में सोचने लगी कि आज वह उसे बहुत बुरा भला कहेगा और हो सकता है कि पिटाई भी करे।

लेकिन परेशान पति ने पत्नि से सिर्फ चार शब्द कहे।

क्या आप बता सकते हैं कि वो चार शब्द क्या होंगें ?

वो चार शब्द थे “I love you dear”

पत्नि पति के इस unexpected व्यवहार से हैरान रह गयी। लेकिन उसे थोड़ी सहानुभूति और दिलासा मिला। और वह पति के कंधे पर सिर रखकर बैठ गयी और पति ने पत्नि को दिलासा दिया कि सब ठीक हो जायेगा और दोनों पति पत्नि अपने बच्चे के लिए ईश्वर से दुआ करने लगे।

कुछ देर बाद डॉक्टर आये और बोले कि “अब आपका बच्चा खतरे से बाहर है और कुछ देर बाद आप बच्चे को घर ले जा सकते हैं।”

पति पत्नि बच्चे को लेकर घर आ गए। लेकिन एक बात पत्नि को परेशान कर रही थी कि मेरी गलती होने के बावजूद भी पति ने एक बार भी मुझे ना तो डांटा ही और नहीं कुछ कहा।

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वह पछतावे का भाव लेकर पति के पास गयी और उससे इसका कारण पूछा।

पति ने उसे समझाते हुए कहा कि तुम्हारी गलती होने के साथ साथ इसमें मेरी गलती भी थी। अगर मैं खुद ही बोतल को उठाकर अलग रख देता तो यह सब नहीं होता। और जो हो गया वो बदला नहीं जा सकता था। लेकिन उस समय जब तुम्हे मेरी सहानुभूति और सहारे की जरुरत थी तब अगर मैं तुम्हे कुछ बुरा भला कहता तो तुम और ज्यादा टूट जाती।

दोस्तों, हम अपनी जिंदगी में ज्यादातर ऐसा करते हैं कि हम गलती मानकर उसे सुधारने के बजाय दूसरों को दोष देने में लग जाते हैं। जिससे परिस्थितियां और ज्यादा बिगड़ जाती हैं और फिर आरोप, इल्जाम लगाने का जो सिलसिला शुरू होता है उससे और ज्यादा बड़ा नुकसान हो जाता है, रिश्ते टूट जाते हैं, परिवार बिखर जाते हैं और अंत में सिवाय पछताने के कुछ नहीं बचता। यहाँ अगर पति हॉस्पिटल पहुँचते ही अपनी पत्नि को डांटना, धमकाना या भला बुरा कहना शुरू कर देता तो शायद स्थिति कुछ और ही होती। वो पत्नि एक माँ भी थी जो अपने बच्चे के गम में बहुत दुखी थी। उस समय उसका पति अगर कुछ गलत कहता तो वो और ज्यादा टूट सकती थी, उसे सदमा लग सकता था, उसे अटैक पड़ सकता था या वो अपने पति पर भी इल्जाम लगा सकती थी कि “बोतल तो पहले आपने देखी थी तो आपने क्यों हटाकर नहीं रखी?” और तब स्थिति इतनी ज्यादा बिगड़ जाती कि उसका नुकसान पहले से कहीं ज्यादा होता। लेकिन पति ने समझदारी दिखाई और ऐसा नहीं होने दिया।   

क्या ना करें जब किसी से कोई गलती हो जाये?

कभी भी किसी से भी गलती होते ही उस पर तुरंत गुस्सा ना करें और ना ही डांटे और ना ही बुरा भला कहें, ना ही उसे कोई सजा दें और ना ही उससे बात करना बंद करें। क्योंकि वो आपका दुश्मन नहीं है वो आपका अपना है।

दोस्तों, जब किसी से गलती होती है तो इसका एहसास उसे भी होता है और अगर गलती थोड़ी ज्यादा बड़ी है तो गलती करने वाले के मन में एक डर सा बैठ जाता है। उस समय उसे सहानुभूति और दिलासे की जरुरत होती है। अगर उस समय आप उस पर गुस्सा करते हैं या उसे डांटते, धमकाते हैं तो गलती करने वाला और ज्यादा परेशान हो जाता है और ज्यादा मानसिक तनाव में आ जाता है और इस तनाव में कभी कभी वो खुद को चोट पहुँचा लेता है या फिर मन ही मन अपने आपको हमेशा के लिए दोषी मान लेता है या फिर वो आप पर ही आरोप इल्जाम लगाने लगता है। और मन ही मन आपसे दूर होता चला जाता है। जिससे दिलों में दूरियां बढ़ जाती हैं और रिश्तों में खटास आ जाती है और लोग अलग हो जाते हैं, घर बर्बाद हो जाते हैं, परिवार बिखर जाते हैं।

क्या करें जब किसी से कोई गलती हो जाये?

अगर कभी भी हमारे घर में परिवार में किसी भी सदस्य से या हमारे किसी भी दोस्त या प्रियजन से कोई भी गलती हो जाये, चाहे कितनी भी बड़ी गलती हो जाये तो सबसे पहले उस गलती का पता करें कि वो गलती क्यों हुई? फिर उस व्यक्ति को, जिससे गलती हुई है दिलासा दें कि सब ठीक हो जायेगा और उसके साथ सहानुभूति जताएं कि आप उसके साथ हैं। उसके बाद जब स्थिति थोड़ी सामान्य हो जाये तब उसे उसकी गलती का एहसास कराएँ और उसे ऐसी गलती दोबारा ना करने के लिए समझायें।

दोस्तों जब आप उसे दिलासा देंगे तो उसके दिल को थोड़ी तसल्ली मिलेगी और उसे ऐसा लगेगा कि आप उसके साथ हैं और वो टूट कर बिखरने से बच जायेगा और उसे अपनी गलती समझ में भी आयेगी और वो उसे कभी दोहरायेगा भी नहीं और उस व्यक्ति के साथ आपका सम्बन्ध, आपका रिश्ता हमेशा हमेशा के लिए मजबूत हो जायेगा।

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