बाड़े की कील

12बहुत समय पहले की बात है, एक गाँव में एक लड़का रहता था | वह बहुत ही गुस्सैल था, छोटी-छोटी बात पर अपना आपा खो बैठता था और लोगों को भला-बुरा कह देता था | उसकी इस आदत से उसके पिता बहुत परेशान थे |  उसकी इस आदत से परेशान होकर एक दिन उसके पिता ने उसे कीलों से भरा हुआ एक थैला दिया और कहा कि , ” अब जब भी तुम्हे गुस्सा आये तो तुम इस थैले में से एक कील निकालना और बाड़े में ठोक देना.” |

लड़का कील लेकर चला गया | पहले दिन उस लड़के को चालीस बार गुस्सा आया और उसने इतनी ही कीलें बाड़े में ठोंक दी| पर धीरे-धीरे कीलों की संख्या घटने लगी,उसे लगने लगा की कीलें ठोंकने में इतनी मेहनत करने से अच्छा है कि अपने गुस्से पर काबू किया जाए और अगले कुछ हफ्तों में उसने अपने गुस्से पर बहुत हद तक काबू करना सीख लिया | और फिर एक दिन ऐसा आया कि उस लड़के ने पूरे दिन में एक बार भी गुस्सा नहीं किया |

जब उसने अपने पिता को ये बात बताई तो उन्होंने ने फिर उसे एक काम दे दिया, उन्होंने कहा कि ,” अब हर उस दिन जिस दिन तुम एक बार भी गुस्सा ना करो इस बाड़े से एक कील निकाल देना |” लड़के ने ऐसा ही किया, और कुछ समय बाद वो दिन भी आ गया जब लड़के ने बाड़े में लगी आखिरी कील भी निकाल दी, और अपने पिता को ख़ुशी से ये बात बतायी|

तब पिताजी उसका हाथ पकड़कर उस बाड़े के पास ले गए, और बोले, ” बेटे तुमने बहुत अच्छा काम किया है, लेकिन क्या तुम बाड़े में हुए छेदों को देख पा रहे हो | अब वो बाड़ा कभी भी वैसा नहीं बन सकता जैसा वो पहले था | जब तुम क्रोध में कुछ कहते हो तो वो शब्द भी इसी तरह सामने वाले व्यक्ति पर गहरे घाव छोड़ जाते हैं |” लड़का अपने पिता कि बात का मतलब समझ चुका था |

दोस्तों गुस्से में कभी कभी हम ऐसा काम कर जाते हैं या कुछ ऐसी बात बोल जाते है जिससे दूसरो के दिलो पर बहुत गहरा घाव बन जाता है | गुस्से में हमारे धन का नुकसान तो होता ही है साथ ही साथ रिश्ते नाते भी ख़त्म हो जाते हैं और यहाँ तक की परिवार तक बिखर जाते हैं | और जब हमारा गुस्सा ठंडा होता है तो सिवाय पछताने के कुछ नहीं बचता | इसलिये कभी भी गुस्सा न करें और थोड़ा बहुत गुस्सा आ भी जाये तो अपना ध्यान गुस्से वाली बात से हटाकर दूसरी जगह लगाएं और गुस्से के दौरान बहुत ही सोच समझकर किसी से कुछ बोलें |


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