आपको क्या बनना है ………शेर या गीदड़

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1किसी गाँव में एक व्यक्ति रहता था |  एक बार वह किसी काम से अपने गाँव से शहर की ओर जा रहा था | रास्ते में एक जंगल पड़ता था | जब वह उस जंगल से गुजर रहा था तो उसे प्यास लगी | वह पास ही जंगल में बहने वाली नदी की तरफ गया | उसने पानी पिया और पानी पीने के बाद वापस लौटने लगा तो उसने देखा कि….वहीं नदी के किनारे एक गीदड़ बैठा था जो शायद चलने फिरने में असमर्थ था |

यह देख उसे बड़ा आश्चर्य हुआ कि ये चल नहीं सकता तो फिर यह जीवित कैसे है ? तभी अचानक उसे एक शेर की जोरदार दहाड़ सुनाई दी | वो व्यक्ति एक ऊँचे पेड़ पर चढ़ गया और इंतजार करने लगा | तभी वहाँ शेर आया जिसने एक ताजा शिकार मुँह में दबोचा हुआ था | वह सब ध्यान से देखता रहा | शेर शायद अपना पेट भर चुका था इसलिए उसने उस शिकार को उस गीदड़ के सामने डाल दिया और चला गया |

वह व्यक्ति यह सब ध्यान से देख रहा था | उसने सोचा कि ईश्वर की लीला अपरम्पार है | वो सब के लिए व्यवस्था करता है | तभी उसके मन में विचार आया कि जब भगवान इस लाचार गीदड़ की मदद कर सकते हैं तो मेरी भी करेंगे |

भगवान में उसकी गहरी आस्था थी इसलिए वो वहीं नदी किनारे एक ऊँची चट्टान पर बैठ गया और भगवान की भक्ति करने लगा | एक दिन बीता…….. फिर दो दिन बीते, लेकिन कोई नहीं आया | उसकी हालत अब कमजोर होने लगी | फिर भी उसने ज़िद पकड़ ली कि भगवान मेरी मदद ज़रूर करेंगे | समय बीता और वह व्यक्ति अपनी ज़िद में कमज़ोर और लाचार होकर वहीँ मर गया | वह मरने के बाद सीधे भगवान के पास पहुँचा और भगवान से कहने लगा – हे भगवन !  मैंने अपनी आँखों से देखा था जब आप ने एक लाचार गीदड़ की सहायता की थी | मैंने आपकी जीवन भर सेवा की फिर आपने मेरी मदद क्यों नहीं की | तब भगवान मुस्कराए और कहने लगे – तुम्हें क्या लगता है ?  जब तुम जंगल में से जा रहे थे तब अपनी मर्जी से नदी पर गए थे और यह सब कुछ देखा था |

..“नहीं ………तुझे प्यास भी मैंने लगाईं थी और तुझे नदी पर भी मैंने ही भेजा था ताकि तू शेर और गीदड़ को देख सके | लेकिन अफसोस, मैंने तुझे शेर बनने के लिए जंगल में भेजा था लेकिन तू गीदड़ बनकर आ गया”|

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दोस्तों, भगवान हम सब को अपनी काबिलियत और अपने वास्तविक रूप को जानने के लिए मौका देता है | अब यह हम पर निर्भर करता है कि हम उसे किस रूप में देखते हैं | हम शेर बनकर मेहनत करके लाचार और बेसहारा लोगो की मदद करें या सब कुछ कर सकने के बाद भी लाचार गीदड़ बन जाएँ |

उस व्यक्ति ने शेर बनकर लोगो की मदद करने के बारे में नहीं सोचा बल्कि लाचार गीदड़ को देखकर वह भगवन के भरोसे बैठ गया की भगवन उसकी भी मदद करेंगे | वह गीदड़ लाचार था इसलिए भगवान ने उसकी मदद की लेकिन वह व्यक्ति लाचार नहीं था वह मेहनत कर सकता था इसलिए भगवान ने उसकी मदद नहीं की | भगवान उन लोगो की मदद नहीं करते जो मेहनत करने लायक होते हुए भी मेहनत न करके भगवान के भरोसे बैठ जाते हैं | इसलिए मेहनत से अपनी ज़िंदगी को बेहतर बनाये और लाचार तथा बेसहारा लोगो की मदद करें |

आपको क्या बनना है ………शेर या गीदड़ ……फैसला आपको ही करना है |


“आपको ये प्रेरणादायक कहानी कैसी लगी , कृप्या कमेंट के माध्यम से  मुझे बताएं ……………….धन्यवाद”

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