संघर्ष से ही हमारी जड़ें मजबूत होती हैं

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8एक बार एक युवक को संघर्ष करते – करते कई वर्ष हो गए लेकिन उसे सफलता नहीं मिली | वह काफी निराश हो गया, और नकारात्मक विचारो ने उसे घेर लिया | उसने इस कदर उम्मीद खो दी कि उसने आत्महत्या करने का मन बना लिया | वह जंगल में गया और वह आत्महत्या करने ही जा रहा था कि अचानक एक सन्त ने उसे देख लिया |

सन्त ने उससे कहा – बच्चे क्या बात है , तुम इस घनघोर जंगल में क्या कर रहे हो ?
उस युवक ने जवाब दिया – मैं जीवन में संघर्ष करते -करते थक गया हूँ और मैं आत्महत्या करके अपने बेकार जीवन को नष्ट करने आया हूँ |
सन्त ने पूछा तुम कितने दिनों से संघर्ष कर रहे हों ??

युवक ने कहा मुझे दो वर्ष के लगभग हो गए, मुझे ना तो कहीं नौकरी मिली है , और ना ही किसी परीक्षा में सफल हो सकां हूँ |

सन्त ने कहा – तुम्हे नौकरी भी मिल जाएगी और तुम सफल भी हो जायोगे | निराश न हो , कुछ दिन और प्रयास करो |

युवक ने कहा – मैं किसी भी काम के योग्य नहीं हूँ , अब मुझसे कुछ नहीं होगा |

जब सन्त ने देखा कि युवक बिलकुल हिम्मत हार चुका है तो उन्होंने उसे एक कहानी सुनाई | कहानी इस प्रकार है |

“एक बार ईश्वर ने दो पौधे लगाये , एक बांस का , और एक फर्न (पत्तियों वाला) का |
फर्न वाले पौधे में तो कुछ ही दिनों में पत्तियाँ निकल आई | और फर्न का पौधा एक साल में काफी बढ़ गया पर बाँस के पौधे में साल भर में कुछ नहीं हुआ |

लेकिन ईश्वर निराश नहीं हुआ |
दूसरे वर्ष में भी बाँस के पौधे में कुछ नहीं हुआ | लेकिन फर्न का पौधा और बढ़ गया |
ईश्वर ने फिर भी निराशा नहीं दिखाई|

तीसरे वर्ष और चौथे वर्ष भी बाँस का पौधा वैसा ही रहा , लेकिन फर्न का पौधा और बड़ा हो गया |
ईश्वर फिर भी निराश नहीं हुआ |

फिर कुछ दिनों बाद बाँस के पौधे में अंकुर फूटे और देखते – देखते कुछ ही दिनों में बाँस का पेड़ काफी ऊँचा हो गया|
बाँस के पेड़ को अपनी जड़ों को मजबूत करने में चार पाँच साल लग गए |

सन्त ने युवक से कहा – कि यह आपका संघर्ष का समय , अपनी जड़ें मजबूत करने का समय है | आप इस समय को व्यर्थ नहीं समझे एवं निराश न
हो | जैसे ही आपकी जड़ें मजबूत ,परिपक्व हो जाएँगी, आपकी सारी समस्याओं का निदान हो जायेगा | आप खूब फलेंगे, फूलेंगे, सफल होंगें और आकाश की ऊँचाइयों को छूएंगें |

आप स्वंय की तुलना अन्य लोगों से न करें |
आत्मविश्वास नहीं खोएं | समय आने पर आप बाँस के पेड़ की तरह बहुत ऊँचे हो जाओगे | सफलता की बुलंदियों पर पहुंचोगे |
बात युवक के समझ में आ गई और वह पुन : संघर्ष के पथ पर चल दिया |

दोस्तों, फर्न के पौधे की जड़ें बहुत कमज़ोर होती हैं जो जरा सी तेज़ हवा से ही जड़ से उखड जाता है | और बाँस के पेड़ की जड़ें इतनी मजबूत होती हैं कि बड़ा सा बड़ा तूफ़ान भी उसे नहीं हिला सकता |

इसलिए दोस्तों संघर्ष से घबराये नहीं| मेहनत करते रहें और अपनी जड़ों को इतनी मजबूत बना लें कि बड़े से बड़ी मुसीबत , मुश्किल से मुश्किल हालात आपके इरादो को कमजोर ना कर सके और आपको आगे बढ़ने से रोक ना सके |
किसी से भी अपनी तुलना ना करे , सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास के साथ अपने लक्षय की और बढ़ते रहे | आप जरूर सफल होंगे और आसमान की बुलंदियों को छुयेंगें |


“आपको ये प्रेरणादायक कहानी कैसी लगी , कृप्या कमेंट के माध्यम से  मुझे बताएं ……………….धन्यवाद”

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