दृढ संकल्प से मिलती है सफलता

हम सभी को कभी ना कभी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है | कभी कभी किसी की कोई बात इतनी कड़वी लग जाती कि हम बहुत दुखी हो जाते हैं | कुछ लोग ऐसी बातो से परेशान होकर तनावग्रस्त हो जाते हैं वहीँ कुछ लोग ऐसी बातो को चुनौती की तरह लेते हैं | इतिहास गवाह है की जिन लोगो ने मुश्किलों को चुनौती की तरह लिया है उन्होंने बुलंदियों को छुआ है |

ऐसी ही एक कहानी से मैं आपको रूबरू करा रहा हूँ |

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प्राचीन काल में एक राज्य था मालव | इस राज्य की राजकुमारी विद्योत्तमा बहुत ही रूपवती और अत्यंत बुद्धिमान थी | उसने प्रतिज्ञा की थी कि जो कोई भी उसे शास्त्रार्थ में हरा देगा वह उसी से विवाह करेगी | विद्योत्तमा से विवाह करने की इच्छा लेकर दूर दूर से अनेकों विद्वान आये लेकिन कोई भी उसे शास्त्रार्थ में हरा नहीं सका | तब अपमान से दुखी होकर उनमे से कुछ विद्वानो ने राजकुमारी से बदला लेने के लिए एक चाल चली | जिससे वे राजकुमारी का विवाह एक मूर्ख व्यक्ति से करवा सकें |

उन्होंने एक मूर्ख व्यक्ति की खोज शुरू कर दी | एक दिन जंगल में उन्होंने एक ऐसे युवक को देखा जो उसी डाल को काट रहा था जिस पर वह बैठा हुआ था | उन्हें वह मूर्ख व्यक्ति मिल गया जिसकी उन्हें तलाश थी | उन्होंने उस मूर्ख युवक को समझा कर तैयार कर लिया और उससे कहा कि यदि तुम मौन रहे तो हम तुम्हारा विवाह राजकुमारी से करवा देंगे |

वे उस युवक को अच्छे से कपडे पहनाकर विद्योत्तमा के पास ले आये और विद्योत्तमा से कहा कि ये युवक मौन साधना में रत होने के कारण संकेतो में शास्त्रार्थ करेगा | विद्योत्तमा संकेतो में प्रश्न पूछती और वह युवक संकेतो में ही उसका उत्तर देता | जैसे एक प्रश्न में विद्योत्तमा ने युवक को प्रश्न के रूप में खुला हाथ दिखाया तो उस मूर्ख युवक ने समझा कि यह थप्पड़ मरने कि धमकी दे रही है | उसके जवाब में उस युवक ने घूँसा दिखाया जिससे विद्योत्तमा को लगा कि वह कह रहा है कि पांचो इन्द्रियां भले ही अलग हों लेकिन सभी एक मन के द्वारा संचालित होती है | संकेतो में बात करने के कारण तथा हारे हुए विद्वानो द्वारा उन संकेतो कि बढ़ा चढ़ा कर व्याख्या करने के कारण विद्योत्तमा को अंत में हार माननी पड़ी और उसने उस मूर्ख युवक से विवाह कर लिया |

कुछ दिनों तक वह युवक मौन साधना का ढोंग करता रहा लेकिन एक दिन ऊँट को देखकर गलत उच्चारण कर बैठा जिससे विद्योत्तमा को सच्चाई का पता चल गया कि उसका पति एक मूर्ख तथा अनपढ़ है | क्रोध में आकर विद्योत्तमा ने उस युवक को धिक्कारते हुए अपमानित करके महल से निकाल दिया | और उससे कहा कि जब तक सच्चे विद्वान ना बन जाओ तब तक वापस लौटकर मत आना |

उस युवक ने उस अपमान को चुनौती कि तरह लेते हुए संकल्प लिया कि वह एक दिन उच्च कोटि का विद्वान बन कर ही रहेगा | संयोग से आचार्य उदयन उसे मिल गए | जिनकी दी हुई शिक्षा व शास्त्रो के कठोर अध्ययन तथा परिश्रम से वह युवक महान विद्वान बन गया | आचार्य की हर परीक्षा में खरा उतरने के बाद वह विदा लेते उनके चरणो में विनत हुआ तो आचार्य ने कहा कि मैं तो मार्ग दिखने वाला एक मार्गदर्शक हूँ | तुम उस देवी का आभार मानो जिसने तुम्हे अपमानित किया जिससे तुम्हारे अंदर वह तड़प, वह जूनून पैदा हुआ जिससे तुम आज एक महान विद्वान हो, नहीं तो तुम आज भी वही मूर्ख तथा अनपढ़ रहते |

उसके बाद वह युवक वापस महल लौटा और उसने विद्योत्तमा को अपना पथप्रदर्शक गुरु माना और विद्योत्तमा ने भी उसे अपना जीवनसाथी माना | उसके बाद सम्राट विक्रमादित्य ने उसे अपने नवरत्नों में शामिल किया | तथा बाद में युवक महाकवि तथा संस्कृत का महा विद्वान् बना तथा उसने अनेकों रचनाएँ, अनेकों ग्रन्थ लिखे |

उस युवक का नाम था महाकवि कालिदास |

तो दोस्तों परेशानियां,कठिनाइयां सभी के साथ होती हैं | अगर आपके माता पिता, भाई या कोई प्रिय मित्र आपको डांटता है या ये कहता है कि तुम किसी लायक नहीं हो तो प्लीज इससे दुखी ना हों | दरअसल वे आपके अंदर उस तड़प को, उस जूनून को जगाना चाहते हैं जिससे आप नालायक से लायक बन सको और अपनी ज़िंदगी में ऊंचाइयों को छू सको |

उनकी डाँट को एक चुनौती की तरह लो तथा दृढ संकल्प के साथ लक्ष्य बना कर जुट जाओ | एक दिन आप उस बुलंदी पर जरूर पहुंचोगे जहाँ तक पहुँचने का आपने सपना देखा है |

जब एक मूर्ख, अनपढ़ व्यक्ति कालिदास बन सकता है तो आप अपने लक्ष्य तक क्यों नहीं पहुँच सकते ……. जरुर पहुंचोगे …..शुरुआत तो करो  |


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