मरने के बाद भी ये लोग कई लोगों को जिंदगी दे गए और अमर हो गए

 

मरने के बाद भी ये लोग कई लोगों को जिंदगी दे गए और अमर हो गए

दोस्तों, आज की मेरी ये पोस्ट उन लोगों को समर्पित है जिनकी महानता और हौसले से प्रेरित होकर मैंने “हौसले को सलाम- The Real Heros” की शुरुआत की थी। और आज की इस पोस्ट में मैं उन लोगों की महानता बारे में ही बता रहा हूँ।

इसे भी पढ़ें :-  “हौसले को सलाम- The Real Hero” की शुरुआत

ये ऐसे लोग हैं, ऐसे हीरो हैं जो मरने के बाद भी अपने शरीर के अंगों को दान (organ donate) करके अमर हो गये हैं। अपने मरने के बाद इन्होने कई मरते हुए लोगों को नयी जिंदगी दी, कई लोगों की जिंदगी के अँधेरे को दूर करके उनकी जिंदगी में रौशनी भर दी है। इनके शरीर के अंग जैसे किडनी, लीवर, आँखें, दिल आदि दूसरे ऐसे लोगों के शरीर में transplant किये गए हैं जो इन अंगों के बिना मरने के कगार पर थे या उनकी जिंदगी में बिलकुल अँधेरा था। ये लोग मरने के बाद भी कई लोगों में जी रहे हैं, कई लोगों की आँखों से देख रहे हैं।

इसे भी पढ़ें :-  बिना उम्मीद, बिना लालच के जरुरतमंदों की मदद करें।

और इस महान काम के लिए इनके परिवार को दिल से सलाम (salute) । जब घर में कोई मौत होती हैं तो बहुत बड़ा ग़म, बहुत बड़ा दर्द, मिलता है, दुखों का पहाड़ टूट पड़ता है, लेकिन इतने दुःख और दर्द के बावजूद इनके परिवार वालों ने इनके organ donate करने की सहमति देकर एक बड़े ह्रदय का, एक महान सोच, एक महान आत्मा का परिचय दिया है। इतना आसान नहीं होता जब घर के किसी सदस्य की लाश सामने पड़ी हो और तब उसके शरीर के अंगों को दान करने का दर्द भरा निर्णय लेना। बहुत कम लोग इतना हौसला और इतनी महानता दिखा पाते हैं। और इन परिवारों की इसी महानता की वजह से ही आज इनके अपने मरने के बाद भी अमर हो गए हैं। और बहुत से लोगों के घरों में जिंदगी लौट आई है, खुशियाँ लौट आई हैं।

मुझे ऐसे बहुत से उदाहरण मिले लेकिन मैं इस पोस्ट में कुछ के बारे में ही बताउँगा। तो आईये जानते हैं ऐसे ही महान लोगों की महानता के बारे में।

दीक्षा श्रीवास्तवलखनऊ : मरने के बाद किया 5 लोगों की जिंदगी को रोशन

deksha shrivastav-lucknow
दीक्षा श्रीवास्तव-लखनऊ

गोरखपुर की रहने वाली 22 वर्षीया दीक्षा श्रीवास्तव लखनऊ में अपने ननिहाल में रहकर बीटेक की पढ़ाई कर रही थी। 9 अगस्त की शाम करीब 7.30 बजे वह अपने पिता के साथ गोमतीनगर स्थित वेव मॉल के पास पैदल जा रही थी। उसी समय तेज रफ्तार से आ रही मोटरसाइकिल ने उसे तेज टक्कर मर दी। टक्कर इतनी तेज थे कि दीक्षा उछल कर दूर गिर गई और उसका सिर जमीन से तेजी से टकरा गया। टक्कर से उसके पिता अनिल श्रीवास्तव भी गंभीर रूप से घायल हो गए।  दीक्षा के सिर में गंभीर चोट आने के बाद उसे इलाज के लिए 9 अगस्त की रात करीब 9 बजे KGMU के Trauma Center लाया गया। यहां उसी दिन देर रात चोटों की सर्जरी की गई। 3 दिन तक दीक्षा का ट्रामा सेंटर में इलाज चला, लेकिन उसकी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ।  12 अगस्त की सुबह डॉक्टरों ने दीक्षा को ब्रेन डेड (Brain Dead)  घोषित कर दिया। दीक्षा के ब्रेन डेड होने के बाद उसके परिजन काफी टूट गए। ब्रेन डेड मरीज के बारे में दीक्षा के परिजनों को KGMU के कांउसलरों ने समझाने की कोशिश की और दीक्षा के अंगों को दान करने की गुजारिश की।

इसे भी पढ़ें :-  जैसा कर्म करोगे वैसा ही फल मिलेगा

दीक्षा के पिता मेडिकल पेशे से जुड़े हैं इसीलिए उन्होंने दीक्षा के अंग दान (organ donate) करने की सहमति दे दी। परिवार की सहमति से दीक्षा के अंग जैसे दिल, लीवर, किडनी, आँखें आदि दूसरे ज़रूरत मंद लोगों को transplant के लिए अस्पतालों को भेजे गए। अब इनके दान किये गए अंग 5 लोगों को transplant किये जायेंगे जिनसे उनकी जिंदगी में नयी रौशनी लौट आई है। मरने के बाद भी ये लड़की 5 लोगों की जिंदगी को रोशन कर गयी।

 

अंजू धीमान- यमुनानगर : मरने के बाद दी 5 लोगों को नयी जिंदगी

anju dhiman-yamunanagar
अंजू धीमान- यमुनानगर

यमुनानगर के रहने वाले रमेश धीमान की बेटी अंजू धीमान अपने चचेरे भाई के साथ बाइक पर जा रही थी। तभी रास्ते में नीलगाय आ गई और टक्कर लग गई। इससे अंजू और उसका चचेरा भाई घायल हो गए। अंजू को PGI hospital रेफर कर दिया गया। उसके सिर पर गंभीर चोटें आई थीं। पीजीआई डाक्टरों ने उसे recover करने की पूरी कोशिश की, लेकिन सफलता हाथ नहीं आई। अंजू के बाकि अंग तो काम कर रहे थे, लेकिन brain बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया था। सुबह doctors ने उसे ब्रेन डेड (Brain Dead)  घोषित कर दिया और उसके बाद परिजनों से अंग दान (organ donate) करने के लिए स्वीकृति ली गई।

अंजू के चाचा सुरेंद्र धीमान ने बताया कि transplant coordinator  उनके पास आए और organ donation concept के बारे में समझाया। अंजू बचपन से ही दानी थी। कोई भी सामान लाती थी तो वह सबमें बांटती थी। समाजिक सेवा के प्रति उसका लगाव भी था। ट्रांसप्लांट को-आर्डिनेटर के समझाने पर अंजू के परिजन आर्गन डोनेशन के लिए तैयार हो गए। उसके बाद पीजीआई ने अंजू के lever, kidney, cornea, Heart  और pancreas  को सुरक्षित तरीके से 5 लोगों को transplant कर दिया। मरने के बाद भी ये लड़की 5 लोगों की जिंदगी दे गयी।

किजल पांडे- ठाणे : 3 लोगों को नया जीवन दे गई

kijal pandey-thane
किजल पांडे- ठाणे

ठाणे के अरुणोदय स्कूल में पढऩे वाली किजल पांडे की पिछले महीने सड़क हादसे में मौत हो गई। किजल अपनी मां के साथ शॉपिंग करने जा रही थी। इसी दौरान एक तेज रफ्तार कार की टक्कर ने किजल को गंभीर रूप से घायल कर दिया। डॉक्टरों की लाख कोशिशों के बावजूद किजल को बचाया नहीं जा सका। किजल के परिजनों ने फैसला किया कि उसकी किडनी और लीवर को  दान किया जाएगा। हालांकि किजल इस दुनिया में नहीं है लेकिन वह मरने के बाद भी 3 लोगों को नया जीवन दे गई।

किजल के परिवार का कहना है कि ये यकीन कर पाना मुश्किल है कि अब वो इस दुनिया में नहीं है। लेकिन हमें सच्चाई को स्वीकार करना होगा। किजल के प्रिंसिपल का कहना है कि वो होनहार छात्रों में से एक थी। उसके जन्मदिन से महज 10 दिन पहले ये हादसा किसी सदमे से कम नहीं है।

सौरव द्विवेदी- नालागढ़ : 5 मरते लोगों को नई जिंदगी दे दी

नालागढ़ निवासी तिलकराज का 24 वर्षीय बेटा सौरव द्विवेदी M-Pharma का स्टूडेंट था। वह पढ़ाई के साथ फार्मास्यूटिकल कंपनी में job भी कर रहा था। 26 अप्रैल को उसका एक्सीडेंट हो गया और उसे PGI hospital में दाखिल कराया गया। उसके बचने की हालत बिल्कुल भी नहीं थी। PGI hospital के ट्रांसप्लांट को-आर्डिनेटर ने सौरव के पिता तिलकराज से organ donation के बारे में बातचीत शुरू की। उनकी counseling की और organ donation की विधि के बारे में समझाया।`

जवान बेटे की मौत के बाद भी पिता ने हौसला दिखाया और पहली counseling में ही तिलकराज ट्रांसप्लांट को-आर्डिनेटर की बात मान गए और अपने बेटे के अंगों को जरूरतमंदों को देने का फैसला लिया। पीजीआई ने अपने प्रोटोकाल के मुताबिक सौरव को दो बार ब्रेन डेड घोषित किया और उसकी दो किडनी, दो कोर्निया, एक पेनक्रियाज और एक लीवर को सुरक्षित निकाल लिया। किडनी, पेनक्रियाज और कोर्निया तो पीजीआई में ही ट्रांसप्लांट किए गए, जबकि लीवर का कोई मैचिंग रिसीपीएंट नहीं मिला। जब लीवर का मैचिंग रिसीपीएंट नहीं मिला तो इस बारे में दिल्ली स्थित इंस्टीट्यूट आफ लीवर एंड बिलेरी साइंस (आईएलबीएस) में बात की गई तो वहां पर मैचिंग मिल गई।

 

दोस्तों, ऐसे बहुत से लोग हैं, बहुत से उदाहरण हैं जिन्होंने अपने शरीर के अंगों को दान करके बहुत से लोगों के जीवन में अँधेरे को दूर करके उजाला किया है। ये बहुत बड़ा और बहुत महानता का काम है। ऐसे हौसले को शत शत नमन।

Medical Science के अनुसार मरने के बाद किसी इन्सान के 8 life saving organs जैसे दिल (Heart), लीवर (Liver), अग्न्याशय (Pancreas), आंतें (Intestines), 2 फेफड़े (Lungs), 2 गुर्दे (kidneys)  donate किये जा सकते हैं। जिनसे 8 लोगों की जान बचायी जा सकती है। और दो आँखों से दो लोगों की जिंदगी का अँधेरा दूर हो सकता है। इस हिसाब से एक इन्सान के मरने के बाद भी उनके शरीर के अंग 10 लोगों की जिंदगी में उजाला कर सकते हैं।

organ donation

 

 

 

 

 

 

 

मेरी ईश्वर से ये ही दुआ है कि किसी को भी ऐसा दर्दभरा दिन ना देखना पड़े। लेकिन होनी को कोई भी नहीं टाल सकता है। ये एक कड़वा सच है। जाने वाला तो इस दुनिया से चला ही जाता है लेकिन उसके परिवार वाले अगर उस दर्दभरे समय में थोड़ा सा हौसला दिखा कर उसके अंग दान कर दें तो इससे 10 लोगों की में रौशनी लौट सकती है।

अगर किसी एक इन्सान के हौसले से शरीर के अंग दान करके 8 लोगों को जिंदगी मिल जाये, 2 लोगों की जिंदगी से अँधेरा मिट जाये, 10 लोगों की जिंदगी में रौशनी और खुशियाँ भर जायें, 8 घरों के चिराग बुझने से बच जायें, 8 माता बहनों का सुहाग उजड़ने से बच जाये, 8 माओं की गोद सूनी होने से बच जाये, 8 घरों के बच्चे अनाथ होने से बच जायें तो इससे बड़ा, महान और पुन्य का काम इस दुनिया में कोई और हो नहीं हो सकता।

 

Related Article :-

 


“आपको ये  आर्टिकल कैसा लगा  , कृप्या कमेंट के माध्यम से  मुझे बताएं ………धन्यवाद”

“यदि आपके पास हिंदी में  कोई  Life Changing Article, Positive Thinking, Self Confidence, Personal Development,  Motivation , Health या  Relationship से  related कोई  story या जानकारी है  जिसे आप  इस  Blog पर  Publish कराना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो और  details के साथ  हमें  gyanversha1@gmail.com  पर  E-mail करें।

पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. ………………धन्यवाद् !”

—————————————————————————————————–

दोस्तों  मैं अपने रोजाना के कई घंटे इस ब्लॉग की पोस्ट लिखने में invest करता हूँ और ये ब्लॉग लोगो की सेवा के उद्देश्य से बनाया गया है ताकि इस पर ऐसी पोस्ट प्रकाशित की जाये जिससे लोगो को अपनी ज़िंदगी में आगे बढ़ने में मदद मिल सके, लोग निराशा से बाहर निकल सकें और अपनी जिंदगी को बेहतर बना सकें ……… अगर आपको मेरा ये काम और  ये ब्लॉग पसंद आता है और इस पर प्रकाशित पोस्ट आपके लिए लाभदायक है तो कृपया इसकी पोस्ट और इस ब्लॉग को ज़्यादा से ज़्यादा लोगों के साथ Share करें ताकि ज़्यादा से ज़्यादा लोगो को इसका लाभ मिल सके………
और सभी नयी पोस्ट अपने Mail Box में प्राप्त करने के लिए कृपया इस ब्लॉग को Subscribe करें।


 

नए पोस्ट अपने E-mail पर तुरंत प्राप्त करने के लिए यहाँ अपना नाम और E-mail ID लिखकर Subscribe करें।

About Pushpendra Kumar Singh 153 Articles
Hi Guys, This is Pushpendra Kumar Singh behind this motivational blog. I founded this blog to share motivational articles on different categories to make a change in human livings. I love to serve the people and motivate them.I love to read and write motivational things. Be friend with Pushpendra at Facebook Google+ Twitter

5 Comments

  1. ऐसे लोग मर कर भी अमर हो जाते है क्योंकि इनके अंग किसी और के शरीर मे जीवित है। ऐसे लोगो को सलाम। सुंदर प्रस्तुति।

  2. बहुत ही बढ़िया article है ….. ऐसे ही लिखते रहिये और मार्गदर्शन करते रहिये ….. शेयर करने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। 🙂 🙂

1 Trackback / Pingback

  1. Management की पढ़ाई पूरी करने के लिये रात में किताब बेचती है ये लड़की | Gyan Versha

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*