Management की पढ़ाई पूरी करने के लिये रात में किताब बेचती है ये लड़की

 

“हौसले को सलाम- The real Hero” कहानी नं० 2 

Management की पढ़ाई पूरी करने के लिये रात में किताब बेचती है ये लड़की

मुश्किलें और संघर्ष जिंदगी का हिस्सा हैं। ऐसा कोई नहीं है जिसने कभी मुश्किलों, मुसीबतों का सामना ना किया हो या जिंदगी में संघर्ष ना किया हो या कभी इनका सामना ना करना पड़े। हर किसी को अपनी जिंदगी में कभी ना कभी किसी ना किसी रूप में मुश्किलों, मुसीबतों, बुरे वक़्त का सामना करना ही पड़ता है। कुछ लोग थोड़े lucky होते हैं कि उन्हें अपनी जिंदगी में थोड़ा बहुत संघर्ष ही करना पड़ता है। लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते है जिन्हें हर कदम पर, जिंदगी के हर मोड़ पर मुश्किलों, मुसीबतों का सामना करना पड़ता है, कदम कदम पर संघर्ष करना पड़ता है।

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जो लोग मुश्किलों, मुसीबतों, संघर्ष से डर जाते हैं या हार मान लेते हैं वे अपनी जिंदगी में कभी आगे नहीं बढ़ पाते हैं। लेकिन जो लोग अपनी जिंदगी की हर मुश्किल का, हर मुसीबत का डटकर सामना करते हैं, संघर्ष करने से डरते नहीं हैं, घबराते नहीं हैं, मैदान छोड़कर भागते नहीं हैं, हार नहीं मानते हैं वे लोग ही अपनी जिंदगी में बुलंदियों को छूते हैं, सपने सपने पूरे करते हैं, आकाश की बुलंदियों पर अपना नाम लिखते हैं। संघर्ष करके मुश्किलों को, मुसीबतों को हराने वाले लोग ही जीत हासिल करते हैं और विजेता कहलाते हैं।

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जिन लोगों को अपनी जिंदगी में ज्यादा संघर्ष करना नहीं पड़ता है, जिन्हें सारी सुख सुविधायें बड़ी ही आसानी से मिल जाती हैं, ऐसे लोगों की किस्मत ऊपर वाला पहले से ही लिखकर भेजता है और उन्हें वो ही मिलता है जो ऊपर वाले ने उनके लिये लिखा है। लेकिन जो लोग अपनी जिंदगी की हर मुसीबत, मुश्किल का डटकर सामना करते हैं और संघर्ष करने से डरते नहीं हैं, घबराते नहीं हैं, ऐसे लोग अपनी किस्मत खुद लिखते हैं और अपनी जिंदगी में हर वो चीज हासिल करते हैं जो वे खुद चाहते हैं।

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आज मैं आपको एक ऐसी लड़की के बारे में बताने जा रहा हूँ जो बहुत ही गरीब परिवार से आती है। इनका परिवार इनकी पढ़ाई का खर्च नहीं उठा सकता है। लेकिन अपने पढने की लगन, जिंदगी में कुछ कर गुजरने के जूनून, और अपनी किस्मत खुद लिखने की जिद से ये लड़की अपने जज्बे और हौसले से अपनी पढ़ाई खुद अपने दम पर कर रही है और ऐसे बहुत से बच्चों के लिए एक मिसाल बन गयी है जो गरीब परिवारों से आते हैं लेकिन गरीबी के कारण अपनी पढ़ाई जारी नहीं रख पाते हैं।

आईये जानते हैं इस लड़की के बारे में।

इस लड़की का नाम है प्रिया कुमारी। प्रिया राँची (झारखण्ड) की रहने वाली हैं। एक गरीब परिवार में जन्मी प्रिया ने किसी तरह से अपनी बारहवीं तक की पढ़ाई पूरी की। उनकी फैमिली आर्थिक रूप से इतनी संपन्न नहीं थी कि प्रिया की आगे की पढ़ाई का बोझ उठा पाए। इसलिए आगे की पढ़ाई के लिए उनके घरवालों ने हाथ खड़े कर दिए। लेकिन प्रिया की आगे management की पढ़ाई करने की ललक और जिद के आगे झुककर उनके माता पिता ने किसी तरह पैसे जुटाकर कोलकाता के सॉल्ट लेक के एक मैनेजमेंट college में उनका admission करा दिया। अब उनके parents ने किसी तरह से उनकी फीस तो दे दी लेकिन उनके वहाँ रहने खाने का खर्चा उठाना उनके बस के बाहर हो गया। अब उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि वहाँ पर रहने खाने और जेबखर्च की व्यवस्था कैसे की जाये?

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मुश्किलों से डरी नहीं  

पैसे की कमी और तंगी से जूझते हुए कोई भी टूट सकता है, हार मान सकता है या गलत रास्तों पर चल सकता है। खासकर एक लड़की के लिये ऐसी परिस्थिति और इतनी मुश्किलों का सामना करना बहुत मुश्किल और कठिनाई भरा होता है। कल्पना कीजिये कि आप किसी अंजान शहर में रह रहे हैं, वहाँ आपकी मदद करने वाला कोई नहीं है, आपके पास रहने खाने और जेबखर्च तक के भी पैसे नहीं हैं। उस वक़्त आपको क्या महसूस होगा?  लेकिन प्रिया मुश्किलों से हार मानने वाली लड़की नहीं थी, हालातों से डरने वाली लड़की नहीं थी, टूट कर बिखरने वाली लड़की नहीं थी, या गलत रास्तों पर चलने वाली लड़की नहीं थी। उसने संघर्ष करने का फैसला किया, हालातों से लड़ने का फैसला किया और मुश्किलों से हारने की बजाय उन्हें हराने का फैसला किया।

उठाया साहसिक कदम

उसने पढ़ाई के साथ साथ काम करके पैसे कमाने का निर्णय लिया। वह पैसे कमाने का ऐसा जरिया तलाश करने लगी जिससे उसकी पढ़ाई भी प्रभावित ना हो और उसे अपनी जरुरत के पैसे भी मिल जायें। अपने एक दोस्त की सलाह पर उसने commission पर किताब बेचने का फैसला किया। यह संस्था विज्ञान और अन्य विषयों पर आधारित किताबें बेचती थी। इस संस्था की किताबें बेचकर उन्हें अपनी ज़रूरत के लिए पैसे मिलने लगे।

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समय की आई मुश्किल

अब उन्होंने किताबें बेचने का फैसला तो कर लिया लेकिन अब उनके सामने समय की दिक्कत आई। उनका college सुबह 7 बजे से शाम तक होता था। इस परेशानी से बचने के लिए उन्होंने रात 8 बजे के बाद किताब बेचने का दूसरा साहसिक फैसला लिया।

उन्होंने कोलकाता के उल्टादंगा में ढाबों के आस-पास किताबें बेचनी शुरू कर दी। प्रिया सड़कों पर घूम-घूम कर अलग-अलग जगहों से आए लोगों को अपनी किताबें बेचने के लिए पहुंचती हैं। ये जरूरी नहीं कि उनकी किताबें बिक ही जाएं! ऐसा भी होता है जब कई दिनों तक उनके बैग से एक भी किताब नहीं बिक पाती। फिर भी वो परेशान नहीं होतीं। फिर काम करते करते उन्हें उन्हें अंदाजा होने लगा कि इस तरह की किताबें खरीदने वाले देर रात मिल सकते हैं तो उन्होंने इस काम को रात 12  बजे तक करने का तीसरा साहसिक फैसला किया।

लड़की होकर रात में किताबें बेचना तो दूर अकेले घर से बाहर निकलना भी हमारे भारतीय समाज में कहीं से भी सुरक्षित नहीं नहीं है। किसी की मजबूरी को समझने वाले बहुत कम और मजबूरी का फायदा उठाने वाले हर कदम पर मिल जायेंगे। फिर भी ये लड़की बिना किसी खौफ़ और डर के अपना काम रही है।

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क्या यह देश विकृत मानसिकता वाले लोगों का देश है?

जब उनसे पूछा गया कि रात को शहर में लड़कियों के साथ इतने हादसे होते रहते हैं। इससे आपको रात में किताबें बेचने पर डर नहीं लगता। तो प्रिया ने पूरे आस्मविश्वास से कहा,

इसमें डरने वाली क्या बात है? इन ढाबों पर कई सारे लोग अपनी फैमिली के साथ आते हैं। यहां पर पुलिस हमेशा गश्त करती रहती है और ये ढाबे वाले मुझे अच्छे से जानते हैं।’ और इससे भी बड़ी बात यह कि क्या सिर्फ कुछ गन्दी मानसिकता वाले लोगों के डर से घर में बैठ जाना चाहिए?  क्या यह देश विकृत मानसिकता वाले लोगों का है?’

उन्होंने बताया कि मैं देर रात घर लौटती हूँ। इस रूट के कई बस ड्राइवर मुझे जानने लगे हैं। वो मुझे लिफ्ट दे देते हैं। अगर ज्यादा देर हो जाती है तो मैं पैदल ही अपने घर चली जाती हूँ।

दोस्तों, प्रिया अपने जज्बे और हौसले से अपने परिवार की स्थिति को बदलना चाहती हैं। वे ऐसे बच्चों और छात्रों के लिए एक मिसाल बन गयी हैं जो अपनी गरीबी के कारण अपनी पढ़ाई जारी नहीं रख पा रहे हैं। ऐसे लोग इसने प्रेरणा लेकर कुछ काम करके अपनी पढ़ाई जारी रख सकते हैं।

Gyan Versha परिवार इनके इस जज्बे और हौसले को सलाम करता है और इनके सारे सपने पूरे होने और उज्जवल भविष्य के लिए कामना करता है ।

एक अपील

दोस्तों, अगर आपके आसपास भी आपको कहीं पर ऐसे मजबूर लेकिन मेहनती लोग मिल जायें जो अपने जज्बे से अपनी गरीबी को दूर करने की कोशिश कर रहे हों तो आपसे जितना भी हो सके, जिस तरह से भी हो सके, उनकी मदद कर दीजिये। आपके मदद करने के उनकी मुश्किलें कुछ हद तक कम हों जायेंगी। और अगर आप उनकी मदद ना भी कर सके तो उन्हें ऐसा माहौल जरुर दे कि वे अपनी मेहनत से अपने सपने पूरे कर सके। उन्हें बेवजह परेशान ना किया जाये

 

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6 Comments

  1. आपने बहुत अच्छा लेख लिखा है बहुत ही सुन्दर तरिके से प्रस्तुत किया है इसके लिए आपका बहुत – बहुत धन्यवाद

  2. पुष्पेन्द्र जी आप बहुत अच्छा लिखते है | आपका हर article शानदार और inspirational होता है |
    keep it continue
    Thank you .

  3. “अपनी किस्मत को कैसे बदले”…… बहुत से लोग इस बात से परेशान है कि उनकी किस्मत बहुत ही बेकार है,, और इस बात पर रोते रहते है…….लेकिन अगर किस्मत को बदलना है तो हौंसले मजबूत होने चाहिए बिलकुल प्रिया की तरह……इनकी लगन हम सबके लिए एक आदर्श है।

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