हम जैसा सोचेंगे हमें उसके वैसे ही परिणाम मिलेंगे

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हम जैसा सोचेंगे हमें उसके वैसे ही परिणाम मिलेंगे

point of viewहमारे सोचने के तरीके से हमारी उम्मीदों, आशाओं और नज़रिये का गहरा सम्बन्ध है। मुश्किलो, मुसीबतों या विपरीत परिस्थितियों में हम जैसा सोचते है, हमारी उम्मीदें और हमारे कार्य वैसे ही बन जाते हैं।

अगर हम मुश्किलों से हार जाते हैं और उन मुश्किलों से निकलने की कोशिश नहीं करते और ये सोच लेते हैं कि “अब मैं ये काम नहीं कर सकता या ये काम मुझसे नहीं होगा या अब मैं अपनी ज़िंदगी में कुछ नहीं कर सकता” तो हम अपनी ज़िंदगी में आगे बढ़ने की सारी उम्मीदों, आशाओं को खो देते हैं। और वास्तव में हम अपनी ज़िंदगी में कुछ नहीं कर सकते और ज़िंदगी की हर एक चीज को नकारात्मकता के साथ देखना हमारा नजरिया बन जाता है।

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लेकिन यदि मुश्किलों से बिना डरे, बिना हारे हम उनसे निकलने की कोशिश करते हैं और अपने मन में, अपने दिल में अपने सपनो को पूरा करने की, अपनी ज़िंदगी में आगे बढ़ने की उम्मीद बना कर रखते हैं, आशाओं की किरण जला कर रखते हैं तो हम ज़िंदगी की हर एक चीज को सकारात्मक नज़रिये से देखेंगे। और फिर हम पाएंगे कि मुसीबतों से निकलने के बहुत सारे रास्ते अपने आप बनते चले जाते हैं और अंत में हम मुश्किलों से निकल कर अपने सपनो को पूरा कर लेते हैं।

Motivational book “ You can Win” के प्रख्यात लेखक शिव खेड़ा कहते हैं कि  “अगर आप सोचते हैं कि आप कर सकते हैं तो आप कर सकते हैं। अगर आप सोचते हैं कि आप नहीं कर सकते हैं तो आप नहीं कर सकते हैं । और दोनों ही सूरतों में …आप सही हैं ।”

ये बिल्कुल सही बात है। हम जैसा सोचते हैं हम वैसा ही बन जाते हैं और वैसा ही हमारा चीजों को देखने का नजरिया बन जाता है।

आज मैं आपके सामने उम्मीदों , आशाओं और सोचने के नज़रिये कि एक ऐसी ही कहानी पेश कर रहा हूँ जिसे अगर आप पढ़कर समझने कि कोशिश करेंगे तो वो आपके सोचने के नज़रिये को बदलने में ज़रूर मदद करेगी।

एक स्कूल के प्रिंसिपल ने अपने तीन अध्यापकों तथा 90 छात्रों को एक साथ बुलाया और अध्यापकों से कहा, “चूँकि आप इस स्कूल के सबसे अच्छे शिक्षक हैं और सबसे ज्यादा योग्य हैं, इसलिए हम आपको ऊँचे I.Q. वाले 90 छात्र दे रहे हैं। हम यह चाहेंगे कि आप इन बच्चों को अगले साल अपनी गति से आगे बढ़ने दें और एक साल बाद हम देखेंगे कि उन्होंने क्या सीखा है? हर व्यक्ति खुश था – अध्यापक  भी और छात्र भी। अगले साल अध्यापकों और छात्रों दोनों को ही बहुत आनन्द आया। अध्यापक सबसे प्रतिभाशाली छात्रों को पढ़ा रहे थे और छात्रों को सबसे योग्य अध्यापकों के पूरे ध्यान और ज्ञान का लाभ मिल रहा था। प्रयोग के अंत में यह परिणाम मिला कि इन छात्रों ने पूरे इलाके के छात्रों से 20 से 30 प्रतिशत ज्यादा marks हासिल किये। अब तो छात्र और अध्यापक दोनों ही बहुत खुश थे। छात्र इसलिए खुश थे  कि उन्हें  बहुत ही योग्य अध्यापकों ने पढ़ाया, जिससे उनके marks  सबसे ज्यादा आये। और अध्यापक इसलिए खुश थे कि वे बहुत ही योग्य हैं और उनके पढ़ाये हुए छात्रों ने सबसे ज्यादा marks हासिल किये थे।

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अगले दिन प्रिंसिपल ने अध्यापकों को बुलाया और उनसे कहा, मुझे आपको बताना है कि मैंने आपसे झूठ बोला था। हमने आपको जो 90 छात्र दिये थे, वे सबसे बुद्धिमान और ऊँचे I.Q. वाले छात्र नही थे। वे तो बहुत ही साधारण और सामान्य छात्र थे, जिन्हें बिना सोच विचार के ऐसे  ही चुनकर आपको दिया गया था।

शिक्षकों ने कहा, इस का मतलब यह है कि हम बहुत ही योग्य शिक्षक हैं। प्रिंसिपल ने आगे कहा, मैंने आपसे एक और झूठ बोला था। आप लोग सबसे योग्य शिक्षक नहीं हैं। मैंने तो 10 अध्यापकों के नाम की पर्ची डालकर उनमे से तीन नाम छांटें थे।

शिक्षकों ने पूछा, तो फिर फर्क किस चीज से पड़ा? इन 90 छात्रों ने पूरे साल बहुत अच्छा प्रदर्शन कैसे किया?

तब प्रिंसिपल ने समझाते हुए कहा कि फर्क आपकी आशाओं, उम्मीदों और सोचने के नज़रिये से पड़ा। आपने सोचा कि आप सबसे योग्य शिक्षक हैं इसलिए आप छात्रों को अच्छे से पढ़ाएंगे।  और ये ही बात आपने छात्रों के दिमाग में भी डाल दी कि वे सबसे ऊंचे I.Q. वाले छात्र हैं इसलिए उन्हें सबसे बेहतर प्रदर्शन करना होगा। और सबने ऐसा ही किया जिसका परिणाम आपके सामने हैं।

तो दोस्तों इस कहानी से हमें ये प्रेरणा मिलती हैं कि  हम अपनी उम्मीदों को, आशाओं को और अपने सोचने के नज़रिये को जैसा बना लेते हैं हमें उसके वैसे ही परिणाम मिलते हैं।

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5 Comments on हम जैसा सोचेंगे हमें उसके वैसे ही परिणाम मिलेंगे

  1. Story ke madhyam se apne bahut hi gahri baat itni aasani se samjhayi hai. So nice

  2. aapka kahna bilkul thik hai ki ham jaisa sochte hai.hm waise hi ban jate hai…isliye hamen hamesha positive aur achha sochna chahiye.

  3. पुष्पेन्द्र जी, बहुत अच्छा लिखते हैं आप. आपका यह लेख भी पसंद आया.

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  1. stop negativity start positivity in hindi | | Gyan Versha

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