जिद्दी बनो : बिना जिद के आप इतिहास नहीं रच सकते

 

जिद्दी बनो : बिना जिद के आप इतिहास नहीं रच सकते

दुनिया में कौन सा ऐसा इन्सान है जो अपनी जिंदगी (life) में सफल (success) होना नहीं चाहता है, जीतना  (win) नहीं चाहता है, आकाश की बुलंदी को छूना नहीं चाहता है। हर व्यक्ति सफल होना चाहता है, जीतना चाहता है, अपनी जिंदगी में नाम कमाना चाहता है। हर आदमी जीतने की, सफल होने की कोशिश भी करता है। लेकिन क्या सभी जीत जाते हैं, सभी सफल हो जाते हैं? इसका जवाब ज्यादातर नहीं में होगा।

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तो अब सवाल ये है कि आखिर वो कौन सी वजह है? वो ऐसी कौन सी बात है? जिसके कारण सिर्फ कुछ लोग ही जीत पाते  हैं, सिर्फ कुछ लोग ही अपनी मंजिल को हासिल कर पाते हैं।

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उस वजह का, उस चीज का, उस बात का नाम है जिद (insistence) । बिना जिद के आप इतिहास नहीं रच सकते। बिना जिद के आप बुलंदियों पर नहीं पहुँच सकते। यहाँ जिद का मतलब बच्चों द्वारा किसी चीज को पाने की जिद से नहीं है। जिद का मतलब है अपनी सारी शक्तियों  (strengths), योग्यताओं (abilities) को संकल्पित  (determinate) करके अपनी मंजिल को पाने के लिए, अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए, जीतने के लिए किया गया अदम्य (indomitable)  साहस, अटूट (unceasing) प्रयास है।

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जो व्यक्ति जीत दर्ज करता है या अपनी मंजिल तक पहुँचता है वो बाकि लोगों से कुछ हटकर होता है। जीतने वाला जीतने की जिद करता है। जीतने वाले को अपनी जीत से अलग, अपनी मंजिल से अलग कुछ और दिखाई ही नहीं देता है। जब तक किसी लक्ष्य को पाने की, किसी मंजिल तक पहुँचने की जिद नहीं होगी तब तक उस लक्ष्य तक, उस मंजिल तक पहुंचा ही नहीं जा सकता है। आप किसी भी महान व्यक्ति को देख लीजिये, किसी भी सफल व्यक्ति को देख लीजिये, आज वो जिस मक़ाम पर हैं वहाँ तक पहुँचने के लिए उन्होंने खुद से जिद की थी और उसी जिद की बदौलत वे बुलंदियों तक पहुँचे हैं। दुनिया में जो भी कोई बड़ा परिवर्तन हुआ है, कोई बड़ा बदलाव आया है वो किसी ना किसी की जिद का नतीजा है।

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इतिहास गवाह है कि आज तक जो भी इतिहास रचा गया है वो किसी ना किसी की जिद के कारण ही बना है। फिर वो चाहें मिल्खा सिंह हों, महात्मा गाँधी हों, उसेन बोल्ट हों, रत्न टाटा हों या सरदार भगत सिंह हों। आज मैं कुछ ऐसे ही उदाहरण आपके सामने पेश कर रहा हूँ जिन्होंने बहुत सी मुश्किलों, बहुत सी मुसीबतों के बावजूद अपनी जिद से इतिहास रचा है, बड़ा बदलाव लाया है, सफलता के शिखर को छुआ है।

विल्मा रुडोल्फ ( Wilma Rudolph)

विल्मा रुडोल्फ को बचपन में पोलियो था। डॉक्टरों ने स्पष्ट कह दिया था कि ये लड़की अब जीवन में कभी नहीं चल पायेगी। लेकिन विल्मा ने चलना ही नहीं दौड़ने का सपना देख लिया और अपने आप से जिद की कि चाहे कुछ भी हो जाये, एक दिन मैं दुनियाँ की सबसे तेज़ धाविका बनूँगी। विल्मा ने धीरे धीरे चलने की कोशिश शुरू की, कई बार गिरी फिर उठी, फिर कई गिरी, फिर उठी, वो बार बार गिरती रही और हर बार उठती रही, और इसी गिरने उठने के सिलसिले के दौरान उसने चलना शुरू कर दिया और फिर दौड़ना। और फिर एक दिन बचपन में पोलियो से ग्रस्त रहने वाली ये लड़की तमाम मुश्किलो से निकलते हुए सच में ओलम्पिक में दौड़ प्रतियोगिता में 3 स्वर्ण पदक जीतकर दुनियाँ की सबसे तेज़ धाविका बनी। विल्मा ने पोलियो को बहाना नहीं बनाया और ना ही अपने सपने को मुश्किल बताया और ना ही अपनी मुश्किलों से डरकर, मुसीबतों से हारकर अपनी जिद को छोड़ा। बल्कि अपनी जिद से उसने तमाम परिस्थितियों से, तमाम चुनौतियों से लड़कर नामुमकिन को मुमकिन करके इतिहास बना दिया और दुनियां की सबसे तेज धाविका बनीं।

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थॉमस अल्वा एडिसन (Thomas Alva Edison)

लगभग 1200  आविष्कार करने वाले अमेरिकी वैज्ञानिक थॉमस अल्वा एडिसन की प्रतिभा को उनके शिक्षक भी पहचान नहीं सके। दिन-रात कल्पना की दुनिया में खोए रहने वाले एडिसन को वे मंदबुद्धि मानते थे। इसी आधार पर उन्हें स्कूल से निकाल दिया गया था। निर्धन परिवार में जन्मे एडिसन  ट्रेन में अखबार  बेच कर गुजारा करते थे। बिजली के बल्ब (electric bulb) का आविष्कार करने के दौरान उनके सैकड़ों प्रयास विफल हुए। लोगों ने उनका बहुत मजाक उडाया और उन्हें भविष्य में ऐसा न करने की सलाह दी। फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने खुद से जिद की कि वे बिजली के बल्ब का आविष्कार करके ही मानेंगे। एडिसन को अपनी कोशिशों पर पक्का यकीन था। इसीलिए वह अडिग रहे। आसान नहीं होता अपनी बात पर अडिग रहना, पर जिसके इरादों में सच्चाई हो, उसे दुनिया की कोई भी ताकत झुका नहीं सकती। अंतत:  उन्होंने बिज़ली के बल्ब का अविष्कार करके पूरी दुनियाँ को बदल कर रख दिया और एक महान वैज्ञानिक बने।

कर्नल सांडर्स (Colonel Sanders)

कर्नल सांडर्स को अपनी जिंदगी में बहुत संघर्ष करना पड़ा। उन्हें कभी Steam Boat  में काम करना पड़ा, कभी Insurance Salesman की नौकरी करनी पड़ी तो कभी रेलरोड में Fireman का काम करना पड़ा। KFC की शुरुआत करने से पहले इनके बनाये चिकन को एक दो नहीं लगभग 1000 लोगों ने नकारा। तभी इनको जिद आ गयी कि एक दिन वो अपनी रेसिपी को पूरी दुनिया के सामने पेश करेंगे। महज सातवीं पास कर्नल सांडर्स के पास कोई Technical या Professional डिग्री नहीं थी, उच्च शिक्षा नहीं थी, पास में धन भी नहीं था फिर भी अपनी जिद से उन्होंने 1009 बार नकारे जाने के बावजूद तमाम संघर्षों , मुसीबतों, निराशाओं से निकल कर 62 वर्ष की उम्र में KFC (Kentucky Fried Chicken) Restaurant Chain  कई देशों में खोलकर देश दुनियां में अपना नाम कमाया और सफलता के शिखर को छुआ।

भारत में जिस उम्र ( 60 वर्ष) में लोग रिटायर होकर अपने घर आराम की ज़िंदगी गुजारते हैं, उससे भी ज़्यादा उम्र (62 वर्ष) में कर्नल सांडर्स ने KFC (Kentucky Fried Chicken) की शुरुआत की और सारी दुनियां के सामने ये साबित किया कि अगर आपके अंदर कुछ कर गुजरने की लगन और इच्छाशक्ति और जिद है तो आप जिंदगी की तमाम बंदिशों को पार करते हुए आकाश की बुलंदियों को छू सकते हैं।

आज KFC के 118 देशों में 18875 outlets हैं।

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जैक मा  (Jack Ma)

जैक मा 5 वीं में 2 बार तथा 8 वीं में 3 बार फेल हुए थे। ग्रेजुएशन करने के लिए अमेरिका की Harvard University  ने उन्हें एडमिशन देने से करीब 10 बार मना किया था। लगभग 30 नौकरियों में उन्होंने apply किया था और सभी में reject कर दिए गए थे। एक बार उन्होंने K.F.C.  में भी apply किया था तब कुल मिलकर 25 लोगों ने apply किया था उनमे से 24 लोग select हो गए और अकेले ये ही reject हुए थे। इतनी बार फेल होने तथा रिजेक्ट होने के बाद भी इन्होने हिम्मत नहीं हारी, ये निराश नहीं हुए। इन्होने खुद से जिद की कि एक दिन वे आकाश की बुलंदियों को छुएंगे।

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और अपनी इसी जिद और सकारात्मक सोच के साथ उन्होंने Alibaba.com वेबसाइट की शुरुआत की। आज Alibaba.com वेबसाइट पर रोजाना 100 मिलियन Customers आते हैं। आज अलीबाबा ग्रुप में लगभग 34985 कर्मचारी काम करते हैं। तथा अलीबाबा की मार्किट वैल्यू 231 अरब डॉलर है तथा जैक मा की संपत्ति 24.1 अरब डॉलर (130800 करोड़ / 1300 अरब रूपए) है। आज वे चीन के सबसे धनी व्यक्ति हैं तथा एशिया के दूसरे सबसे धनी व्यक्ति हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दूँ कि एशिया में कुल 48 देश हैं। यानि कि 48 देशो में दूसरे सबसे धनी व्यक्ति। भारत के सबसे धनी व्यक्ति मुकेश अम्बानी इस लिस्ट में चौथे नंबर पर हैं।

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दोस्तों, जब आदमी के अन्दर जिद आ जाती तो फिर उसे कोई भी मुश्किल, कोई भी मुसीबत, कोई भी विफलता रोक नहीं सकती। जिद्दी व्यक्ति जो चाहता है उसे करके ही छोड़ता है, अपनी मंजिल को पाकर ही दम लेता है। जिद्दी इन्सान को सिर्फ अपना लक्ष्य दीखता है, सिर्फ अपनी मंजिल दिखती है।

एक कहावत है “जहाँ चाह वहाँ राह”। अगर आप किसी चीज की चाहत कर लेंगे तो उसे पाने के रास्ते तो अपने आप बनने लगेंगे। इसलिए आप अपनी जिंदगी में चाहे जो भी करते हैं या करना चाहते हैं उसके लिए जिद करें। जिद किसी भी चीज  की हो सकती है जैसे :-

  1. अगर आप student हैं तो अच्छे नंबर लाने की जिद करें।
  2. अगर आप किसी exam की तैयारी कर रहे हैं तो उसको एक ही बार में clear करने की जिद करें।
  3. अगर आप business करते हैं तो अपने business को top पर पहुँचाने की जिद करें।
  4. अगर आप writer है या ब्लॉग लिखते हैं तो अपने blog को top पर पहुँचाने की जिद करें।
  5. अगर आपको कोई खेल पसंद है तो top का खिलाडी बनने की जिद करो।
  6. अगर आपको गाना पसंद है तो top का singer बनने की जिद करो।
  7. अगर आप doctor बनना चाहते हैं तो top का doctor बनने की जिद करो।
  8. अगर आप engineer हैं या बनना चाहते हैं तो top का engineer बनने की जिद करो।

मतलब कि आप जिस भी क्षेत्र में हैं, या जिस भी क्षेत्र में जाना चाहते हैं उस क्षेत्र में top पर पहुँचने की जिद करो। चाहें कितनी भी मुश्किलें आयें, चाहे कितनी भी मुसीबतें आयें, चाहे कितनी भी विपरीत परिस्थितियाँ हों अपनी जिद को न छोड़ें, अपने सपनों को न छोड़ें बल्कि अपनी जिद को और मजबूत करके अपनी मंजिल को हासिल करें, अपने लक्ष्य को प्राप्त करें।

Motivational Speaker विवेक बिंद्रा कहते हैं कि “एक व्यक्ति तभी इतिहास रचता है जब वो जिद्दी हो जाता है। जिद को बड़ा करना चाहिए। जिद को पालो। जिस दिन इतनी हिम्मत आ गई और आप अपनी जिद को पालकर बड़ा कर गए। आपको सफलता के नए रास्ते मिल जायगे और अगर नहीं मिले तो आप खुद अपना रास्ता बना लेंगे।”

 

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12 Comments

  1. बहुत ही बढ़िया article है ….. ऐसे ही लिखते रहिये और मार्गदर्शन करते रहिये ….. शेयर करने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। 🙂 🙂

  2. सही कहा आपने। बिना जिद के इतिहास नहीं रच सकते। सुन्दर प्रस्तुति।

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