असफलताओं से ही मिलती है सफलता की राह

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1दोस्तों हम में से लगभग सभी अपने सपनो को, अपनी ख्वाहिशों को पूरा करना चाहते हैं और अपनी ज़िंदगी में सफल होना चाहते हैं | और इसके लिए हम मेहनत भी करते हैं | लेकिन क्या हम सभी अपने सपनो को पूरा कर पाते हैं, अपनी मेहनत में सफल हो पाते हैं ? ज्यादातर नहीं , क्योंकि यह इतना आसान नहीं होता है | अपने सपनो को पूरा करने के लिए, अपनी मंजिल तक पहुँचने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है, बहुत सी मुश्किलों, बाधाओं से होकर गुजरना पड़ता है और बहुत सी असफलताओ का सामना करना पड़ता है |

कुछ लोग मुश्किलों, बाधाओं से घबराकर, असफलताओं से हार कर प्रयास करना छोड़ देते हैं | और कुछ लोग तो अपनी मंजिल के बेहद करीब पहुंचकर हार मान लेते हैं | लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो अपनी मुश्किलों, बाधाओं को हराकर, अपनी असफलताओं से सीख लेकर अपनी मंजिल तक पहुँचते हैं और सफल होते हैं |

ऐसे ही एक व्यक्ति के बारे में मैं यहाँ आपको बता रहा हूँ जिन्होंने हज़ारों असफलताओं के बाद भी बिना घबराये मेहनत की और सफल भी हुए | उनका नाम हैं थॉमस अल्वा एडिसन |

थॉमस अल्वा एडिसन का जन्म 11 फ़रवरी 1847 को अमेरिका में हुआ था | बचपन में एक एक्सीडेंट में इन्होने अपने सुनने की क्षमता को आंशिक रूप से खो दिया था | कुछ नया करने की, कुछ नया सीखने की जिज्ञासा उनमे बचपन से थी | अपनी इसी जिज्ञासा के कारण एक दिन उन्होंने एक चिड़िया को कीड़े खाते हुए देखा और सोचा कि चिड़िया उड़ने के लिए कीड़ो को खाती है | इसके बाद एक दिन उन्होंने कुछ कीड़ो का मिश्रण बनाकर एक छोटी लड़की को इस सोच के साथ पिला दिया कि ये लड़की भी उड़ने लगेगी | लड़की उडी तो नहीं बल्कि बुरी तरह बीमार पड़ गयी | इसके बाद उन्हें बहुत डाँट पड़ी | ऐसी ही अजीबोगरीब हरकतों के कारण लोग उन्हें मंदबुद्धि समझते थे और इसी कारण उन्हें स्कूल से भी निकल दिया था | लेकिन उनकी माँ ने उन्हें बहुत प्यार और संस्कार दिए जिससे वे मानसिक रूप से बहुत मजबूत हो गए | अपनी इन्ही अजीबो गरीब हरकतों और कुछ नया करने कि जिज्ञासा ने उन्हें बहुत बड़ा आविष्कारक बना दिया |

उन्होंने हज़ारो आविष्कार किये जिनमे कई बार वे सफल हुए तो बहुत बार असफल भी हुए | लेकिन अपनी असफलताओ से उन्होंने कभी हार नहीं मानी और अपनी मेहनत तथा जुझारूपन से उन्होंने सभी असफलताओ को मात देकर बहुत बड़े बड़े आविष्कार किये | उनका एक आविष्कार “बिजली के बल्ब का आविष्कार” एक महान आविष्कार साबित हुआ जिसने लोगो कि ज़िंदगी को ही बदल कर रख दिया |

बल्ब के आविष्कार से पहले एडिसन लगभग 1000 बार असफल हुए तब जाकर उन्हें सफलता मिली | बल्ब के फिलामेंट को बनाने के लिए उन्होंने घास के तिनके से लेकर सूअर के बाल तक पर लगभग 1000 प्रयोग किये जो असफल रहे | उसके बाद उन्हें फिलामेंट के लिए उपयुक्त पदार्थ मिला जिससे उन्होंने बल्ब का निर्माण कर पूरी दुनिया को रोशन कर दिया |

दोस्तों एडिसन हज़ारो प्रयोगो के असफल होने के बाद भी निराश नहीं थे, थके हुए नहीं थे और घबराये हुए नहीं थे बल्कि खुश थे | एक बार उनसे किसी ने पूछा कि लगभग 1000 प्रयोगो में असफल होने के बाद आपको कैसा लगा था | तो उन्होंने मुस्कुराते हुए जवाब दिया – मैं 1000 प्रयोगो में असफल हुआ ही नहीं था बल्कि मैंने 1000 ऐसी चीजों की खोज की जिनसे फिलामेंट नहीं बन सकता | इसे कहते हैं सकारात्मक सोच | उनके महान आविष्कारों के कारण उन्हें “आविष्कारों  का बादशाह” कहा जाता है |

तो दोस्तों जब एक मंदबुद्धि बालक अपनी मेहनत, जुझारूपन और कुछ नया करने की जिज्ञासा के साथ तमाम विपरीत परिस्तिथियों , असफलताओं को हराकर एक महान वैज्ञानिक बन सकता है तो आप क्यों नहीं |

इसीलिए कभी भी असफलताओं से डरे नहीं, मुश्किलों , बाधाओं से घबराये नहीं तथा सकारात्मक सोच के साथ मेहनत करते रहें | एक दिन आप देखेंगे कि आप तमाम मुश्किलों , बाधाओं, और असफलताओं को हराकर जीत गए हैं |


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