10 अपेक्षायें जो हमें दूसरों से नहीं रखनी चाहियें

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10 अपेक्षायें जो हमें दूसरों से नहीं रखनी चाहियें  (10 things to stop expect from others)

शायद ही कोई ऐसा इंसान होगा जिसे कभी भी किसी ना किसी से कोई अपेक्षा (expectation) ना हो या ना रहीं हो। या कोई उम्मीद ना रही हो। हर एक व्यक्ति को किसी ना किसी से किसी ना किसी तरह की अपेक्षा जरुर रहती है। हर व्यक्ति अपने परिवार से, अपने बच्चों से, अपने मित्रों से, रिश्तेदारों से, कोई ना कोई अपेक्षा जरुर रखता है। माता पिता अपने बच्चों से, बच्चें माता पिता से, पति-पत्नि से, पत्नि-पति से, दोस्त-दोस्त से, मतलब हर कोई अपेक्षा रखता है। अपेक्षा रखना यूँ तो स्वभाविक गुण है और कुछ हद तक रखनी भी चाहिये, वर्ना बिना अपेक्षाओं और उम्मीदों के जिन्दगी बेरंग हो जायेगी। लेकिन जब हम दूसरों से कुछ ज्यादा ही अपेक्षायें रख लेते हैं या कुछ ज्यादा ही उम्मीदें लगा लेते हैं तो यही अपेक्षायें हमारे दुखों का कारण भी बनती हैं। जैसे अगर हम किसी से अपेक्षा रखें कि वह खुद को हमारे लिये बदल दे या जैसा हम चाहते हैं वैसा बन जायें या हमारे अनुसार काम करें तो ये एक बेवकूफी होगी। क्योंकि जब हम दूसरों के लिये खुद को आसानी से नहीं बदल सकते तो दूसरों से ये उम्मीद रखनी बेकार है, बेमानी हैं।

expectations in hindi

जब कोई हमारी अपेक्षाओं को पूरा करता है या जैसा हम चाहते हैं वैसा ही करता है तो हमें खुशी होती है लेकिन जब हमारी अपेक्षायें पूरी नहीं होती है तो हम दुखी हो जाते हैं, व्यथित हो जाते हैं, अन्दर से टूट जाते हैं।

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आज मैं आपको ऐसी ही 10 बातों के बारे में बताने जा रहा हूँ जिनकी दूसरों से अपेक्षा नहीं रखनी चाहिये। इन बातों का ध्यान रखकर हम काफी हद तक परेशानियों से बच सकते हैं, tensions से बच सकते हैं।

1. दूसरों से ये अपेक्षा मत रखो कि वो आपसे हमेशा सहमत हों, आपकी हर बात से, हर विचार से सहमत हों

हर इंसान की सोच (thinking), धारणा (opinion), और समझ (understanding) अलग अलग होती हैं।  इसलिये ये जरूरी नहीं है कि सभी लोग आपकी हर बात से या हर विचार से सहमत (agree) हों, या हमेशा आपका समर्थन करें। यहाँ तक कि आपके माता पिता, आपका सबसे अच्छा दोस्त या पति या पत्नि भी आपकी  हर एक बात से सहमत नहीं होते हैं।

लोगों का आपकी हर बात पर सहमत नहीं होने का मतलब ये भी नहीं है कि वे आपको नीचा दिखाना चाहते हैं या उनको आपकी परवाह नहीं हैं। हो सकता है कि उनके पास आपसे बेहतर solutions हों।

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कुछ लोग जान बूझकर भी आपसे सहमत नहीं होना चाहते हैं। इसलिये दूसरों से हमेशा ये अपेक्षा मत रखो कि वो आपसे या आपकी हर बात से as it is सहमत होगें।

2. दूसरों से ये अपेक्षा मत रखो कि वे आपके अनुसार काम करें

हर व्यक्ति का काम करने का अपना एक अलग तरीका होता है, अलग पसंद होती है और उसी के अनुसार वे काम करते हैं। अब अगर हम उनसे ये अपेक्षा रखें कि जैसा हम चाहते हैं वे वैसा ही काम करें तो ये सम्भव नहीं है। माता पिता अपने बच्चों से ये अपेक्षा रखते हैं कि वे उनके अनुसार पढाई करें और उनके अनुसार कैरियर बनायें और बुढ़ापे में उनका सहारा बनें। इसी तरह से कुछ लोग अपने परिवार से अपने according चलने की अपेक्षा रखते हैं, कंपनी में साथ काम करने वाले लोग, पति पत्नी, प्रेमी प्रेमिका, रिश्तेदार या दोस्त भी ये अपेक्षा रखते हैं कि लोग उनके अनुसार चलें, उनके अनुसार काम करें। लेकिन जब लोग उनके अनुसार नहीं चलते हैं उनके अनुसार काम नही करते हैं तब उन्हे दुःख होता है, झगड़े या मनमुटाव की स्थिति बन जाती है और तनाव बढ़ जाता है। इसलिये जो जैसा कर रहा है उसे उसके अनुसार करने दें। हाँ अगर ज्यादा जरूरी है तो उस व्यक्ति से बात करके, उसे समझा कर काम को सही तरह से करने के लिये कहें। लेकिन अपने तरीके से करने की अपेक्षा ना रखें।

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3. दूसरों से ये अपेक्षा ना रखें कि वे बिल्कुल perfect हों या कोई गलती ना करें

दुनिया का हर इंसान किसी ना किसी चीज के लिए संघर्ष कर रहा है। कोई भी Perfect नहीं है। कुछ ना कुछ कमियाँ सभी में होती हैं या कुछ कमियाँ हम दूसरे लोगों में निकाल देते हैं। ऐसा भी कोई नहीं है जो गलतियाँ ना करता हो। थोड़ी बहुत गलती हर किसी से होती है और गलतियाँ करने के बाद ही इंसान सीखता है और अपने आपको पहले से बेहतर बनाता है। इसलिये जिसे आप चाहते हैं, पसंद करते हैं, या आपके परिवार का कोई सदस्य या मित्र, किसी से भी ये अपेक्षा ना रखें कि वो बिल्कुल perfect हो या कभी गलतियाँ ना करें।

4. कभी किसी से ये अपेक्षा ना रखें कि वे आपके लिये बदल जाये

किसी के लिये खुद को बदल पाना बहुत मुश्किल काम है। हाँ कुछ लोग गलत आदतें या गलत काम छोड़कर दूसरों को खुशियाँ दे सकते हैं। लेकिन किसी के लिये पूरी तरह बदल जाना बहुत मुश्किल है। कुछ लोग अपने ego के कारण भी अपने आप में change नहीं करते हैं तो कुछ लोगों की अपेक्षायें ही बेवजह होती है, बेमतलब होती हैं। जैसे – घर परिवार या relationship में कुछ लोग ये अपेक्षाये रखने लगते हैं कि लोग उनके हिसाब से सोये, उनके हिसाब से उठे, उनकी पसंद का खाना खायें, उनकी पसंद के कपड़े पहने, उनकी पसंद का T.V. Channel देखें, उनके लिये अपनी आदतों को बदल दें, दोस्तों के साथ घूमने ना जायें या दोस्तों से ज्यादा बात ना करें आदि। हर इंसान की पसंद अलग अलग होती है। जिससे उसे ख़ुशी मिलती है वो वही काम करता है। अगर आप इन सब चीजों के लिये खुद को नहीं बदल सकते तो आपको दूसरों से भी इसकी अपेक्षा नहीं रखनी चाहिये।

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5. कभी किसी से ये अपेक्षा मत रखो कि वो कभी ना बदले

क्या आप आज भी वैसे ही हैं जैसे दो साल पहले थे? क्या आज भी आपकी सोच, आपकी ख्वाहिशें, आपके शौक ऐसे ही हैं जैसे दो साल पहले थे? शायद नहीं। तो फिर हम दूसरों से ये अपेक्षा कैसे कर सकते हैं कि वे कभी नहीं बदलेंगे?

आज के समय में हर इंसान अपनी जिन्दगी में संघर्ष कर रहा है, एक युद्ध लड़ रहा है अपने आपको बेहतर बनाने के लिये, अपनी जिन्दगी को बदलने के लिये।

समय के साथ साथ, जिन्दगी की प्राथमिकताओं बदल जाने से, जिम्मेदारियों की वजह से, अपने अनुभवों के आधार पर, परिस्थितियों के अनुसार, या खुद को बेहतर बनाने के लिये इंसान के अन्दर बहुत कुछ बदल जाता है। उसकी सोच, शौक, रहन सहन, ख्वाहिशें, उसके सपने बदल जाते हैं।

परिवर्तन संसार का नियम है। इसलिये हमें कभी भी किसी से ये अपेक्षा नहीं रखनी चाहिये कि वो इंसान जैसा पहले था  आज भी हमारे लिये वैसा ही हो। और ना ही किसी से इसकी शिकायत ही करनी चाहिये।

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6. कभी किसी से ये अपेक्षा ना रखें कि वो हमेशा आपका साथ देगा

अगर आपकी जिन्दगी में कोई ऐसा इंसान है जो हमेशा आपका साथ दे, जो आपके हर सुख दुःख में आपके साथ रहे, जो आपके लिए किसी भी समय तैयार रहे, तो इससे बड़ी खुशनसीबी आपके लिये भला और क्या हो सकती है?

लेकिन आज के समय में इस तरह का इंसान मिलना बहुत मश्किल है और अगर मिलता भी है तो लोग उसकी कद्र नहीं करते। आज के समय में हर कोई किसी ना किसी मतलब से आपके पास आता है। जैसे ही उसका मतलब पूरा हुआ वो आपको छोडकर चला जाता है। यहाँ तक कि आपके परिवार के लोग भी, मित्र, रिश्तेदार या जिसे आप सबसे ज्यादा प्यार करते हैं वो भी, बिना मतलब के हमेशा आपका साथ नही देगा। बहुत कम लोग निस्वार्थ किसी का साथ देते हैं। इसलिये बेहतर यही होगा कि आप लोगों से ये अपेक्षा, ये उम्मीद कभी ना रखें कि वो हर परिस्थिति में या हमेशा ही आपका साथ देंगे।

7. दूसरों से ये अपेक्षा ना रखें कि वे आपको समझें

कुछ लोगों की ये शिकायत होती है कि उन्हें कोई नहीं समझता है। दोस्तों सब अपने अपने काम में busy हैं। किसी के पास भी इतना time नहीं होता है कि वो आपकी बात को या आपकी परेशानी को ध्यान से सुने और समझे। और ज्यादातर लोगों को आपकी बात को seriously सुनने में कोई interest भी नहीं होता है। यहाँ तक कि आपकी मजाक उड़ाने वाले बहुत मिल जायेंगे। जब आप किसी से अपने दिल की बात या परेशानियों के बारे में बात करते हैं तो ज्यादातर लोग उस बात को हँसी में टाल जाते हैं या उसका मजाक बना देते हैं या फिर आपकी बातों पर ध्यान ही नहीं देते हैं। जिससे आप अन्दर अन्दर परेशान होते रहते हैं, घुटते रहते हैं। अपनी समस्याओं के बारे में या किसी बात को लेकर दूसरों से चर्चा तो करें लेकिन उनसे ये अपेक्षा ना करें कि वो आपकी बात को समझेंगे, आपकी परेशानी को समझेंगे, आपकी भावनाओं को समझेंगे। अपनी समस्याओं, परेशानियों से आपको खुद ही बाहर निकलना है और अपने सपने खुद ही पूरे करने हैं।

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8. दूसरों से ये अपेक्षा ना करें कि वे आपका सम्मान करें

अपने आप को शीशे में देखो और अपने बारे में seriously सोचो कि आप सच में वही हो जो आप दूसरों के सामने होने का दिखावा करते हो या आप लोगों के सामने झूठा दिखावा करते हो। अपने आप को उस सम्मान के लायक बनाओ। अपने आपको वही बनाओ जो आप दूसरों के सामने दिखते हो। अच्छे काम करो, लोगों की मदद करो, किसी का बुरा मत करो, खुश रहो और दूसरो को भी खुश रखो। दिखावा करने वाले लोगों का कोई भी सम्मान नहीं करता है।

अपने आप को लेकर आपके मन में आपकी जो image है ये जरूरी नहीं कि दूसरों के मन में भी आपकी वही image हो। लोग आपको हमेशा अपने दिमाग और ज्ञान से ही treat करते हैं। जितना उनमें दिमाग होगा, जितना उन्हें ज्ञान होगा उसी तरह की बात वे आपसे करेंगे। कभी कभी कुछ लोगों को उनके काम, ज्ञान और qualification के according सम्मान नहीं मिल पाता तो कभी कभी लोग बिना किसी काम या ज्ञान के ही सिर्फ ego के कारण ही सम्मान पाने की अपेक्षा रखतें हैं। कुछ लोग अपनी ego के कारण भी दूसरों का सम्मान नहीं करते हैं। इसलिये कभी भी किसी से ये अपेक्षा न करें कि सभी लोग आपका सम्मान करें।

9. दूसरों से ये अपेक्षा मत रखो कि वे आपको हमेशा प्यार करें

कभी भी ये जरुरी नहीं होता कि आपके मन में किसी के लिए जो feelings है वहीँ feelings आपके लिए उसके मन में भी हों। या आप किसी के लिए जैसा सोचते हो बिल्कुल वैसा ही वो आपके लिए सोचे। कभी भी ये जरुरी नहीं होता कि जितना प्यार और care आप दूसरों से करते हैं उतना प्यार और care वो भी आपसे करें।

हर इंसान की सोच, पसंद अलग अलग होती है। कब किसी का किसी पर दिल आ जाये, कब किसी को किसी की बात पसंद आ जाये, कब किसी की कोई बात बुरी लग जाये, कब कोई किसी को छोड़कर चला जाये, कहा नहीं जा सकता। यहाँ ज्यादातर लोग अपने काम से, अपने मतलब से आपके पास आते हैं और काम निकलने के बाद, अपना मतलब निकलने के बाद, आपकी भावनाओं से खेलकर, आपको धोखा देकर, आपको छोड़कर चले जाते हैं।

इसलिये आप बेशक किसी से प्यार करो, बेशक किसी के प्रति कोई feelings रखो लेकिन कभी भी ये अपेक्षा मत रखो कि वो भी आपको हमेशा प्यार करें या उसके मन में भी आपके लिए कोई feelings हों।

10. किसी से भी ये अपेक्षा मत रखो कि वो आपको हमेशा खुश रखे

सच्ची खुशी हमेशा अपने अन्दर होती है। अगर आप बाहर खुशी की तलाश करोगे तो सिवाय दुःख के कुछ नहीं मिलेगा। आप दूसरों से ये अपेक्षा नहीं रख सकते कि सभी लोग आपको खुशियाँ दे, या कोई आपको जिन्दगी भर खुश रख सके। दूसरे लोग या जिसे आप चाहते हो वो हमेशा वो काम नहीं कर सकते जो आपको खुशी दें। या आप किसी से ये अपेक्षा नहीं रख सकते कि वो आपकी हर उदासी, हर दुःख, हर परेशानी में आपको खुश करें।

आपको हमेशा दूसरों की आदतें, शौक, रहन सहन पसंद नहीं आएगा, और न ही किसी और को आपकी आदतें, आपके शौक, आपका रहन सहन हमेशा पसंद आयेगा। कभी न कभी इस बात को लेकर आपका झगड़ा होगा, मनमुटाव होगा, मनों में दूरियाँ होंगी और तनाव की स्थिति बनेगी। कभी कभी बहुत सी उदासियाँ, बहुत सी परेशानियाँ अकेले ही झेलनी पड़ती हैं  और उस समय कोई भी आपके साथ नहीं होता है, कोई भी आपको भावनात्मक सहारा नहीं देता है।

इसलिये आपको खुद ही ऐसे काम करने हैं जो खुशी दे सकें, आपको खुश रख सकें।

दोस्तों, हमारी अपेक्षायें ही हमारे दुखों का कारण बनती हैं। हम अपने जानने वालों से या उन लोगों से जो हमारे करीब होतें हैं, कुछ ज्यादा ही अपेक्षायें रखने लगते हैं, लेकिन जब वहीँ अपेक्षायें पूरी नहीं होती हैं, तो हमें बुरा लगता है, जिससे मनों में दूरियाँ पैदा हो जाती हैं और रिश्तों में दरार पड़ जाती है।

एक बार आप भी शांत होकर ऊपर बताई गयी बातों के बारे में ध्यान से सोचें और पता करें कि कहीं आप भी किसी से ऐसी कोई अपेक्षा रखकर परेशान तो नहीं हो रहे हो, दुखी तो नहीं हो रहे हो।

इसलिये ऊपर बतायी गयी बातों को ध्यान से पढ़ें और समझें। जो बातें मैंने आपको ऊपर बतायी हैं उनकी अपेक्षायें दूसरे लोगो से ना रखें। तभी आप अपनी जिंदगी में परेशानियों को कम कर सकते हैं और खुशियों को बढ़ा सकते हैं।

 

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22 Comments

  1. Very nice thoughts AAJ apki baate padhkr bahut achha LGA mano ek nyi soch mil gyi ho life ke lite so thank you for these ten points

  2. aap ka ye article muje bahut achha lga hai .
    prernadayad soch waali post bhi bahut hi achhi lagi thi ye bhi ush se better hai umeed hai aap aise hi achhe aur gyan ki article hmare sath share kroge

  3. ओह… बहुत कठिन बात बता दी आपने. आज के युग में तो यह और भी अधिक कठिन हो गया है. सामान्यतः ऐसी मनोवृत्ति रखनेवाले लोग लाखों में एक ही होते हैं और वे तमाम दुनियावी बातों से ऊपर उठ चुके होते हैं.

    लेकिन इंसान करे तो क्यो करे. आज की दुनिया में सभी को एक-दूसरे से कोई-न-कोई अपेक्षा तो होती ही है, जो पूरी नहीं होती तो दिल दुखता है.

    मुझे आपका ब्लॉग बहुत अच्छा लगा. समय की कमी के कारण अब बहुत कम पोस्टें ही देख पाता हूं. सब्सक्राइब कर लिया है ताकि ई-मेल में पोस्टें मिलती रहें. शुभकामनाएं.

  4. आपने जिन 10 बिंदुओं पर अपनी राय दी है कि हमें इन बिंदुओं पर दूसरों से अपेक्षाएं नहीं करनी चाहिए। बिल्‍कुल सही और प्राासंगिक हैं। हम अक्‍सर दूसरों से कुछ ज्‍यादा ही अपेक्षाएं पाल लेते हैं। जिनका खामियाजा हमें जीवन में कई बार भुगतना पड़ता है। बहुत ही सुंदर और प्रभावी लेख।

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