चेहरे को नहीं दिल को बनायें खूबसूरत

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पहली बार में जब हम किसी को देखते हैं या किसी से मिलते हैं तो हमारी नजर उसकी शक्ल सूरत पर ज्यादा जाती है। क्योंकि हम उसकी बाहरी खूबसूरती से प्रभावित होते हैं। ज्यादातर सामान्य सी शक्ल, सूरत या थोड़े काले सांवले इंसान को लोग पहली बार में उतना महत्व नहीं देते है जितना कि किसी खूबसूरत या गोरे इंसान को। कई बार लोग बिना ये जाने कि वो इंसान वास्तव में अंदर से कैसा है? उसके बारे में गलत धारणाएं बना लेते है। अगर कोई इंसान चेहरे से खूबसूरत है तो उसकी ओर ज़्यादा आकर्षित होते हैं और अगर कोई इंसान साधारण सी शक्ल या सूरत का है तो उसकी ओर कम आकर्षित होते है।

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कई बार ऐसा होता है कि सामने वाला शक्ल-सूरत से इतना बुरा दिखता है कि उसके करीब जाने व बात करने से पहले हमें सोचना पड़ता है, बिना उसके बारे में ये जाने कि वो अंदर से सोना है या पीतल। लेकिन कोई ये क्यूं नहीं समझता है कि चेहरा एक समय के बाद खूबसूरती खो देता है।

ये बात शत प्रतिशत सत्य है कि चेहरे की सुंदरता या बाहरी खूबसूरती हमेशा के लिए नहीं होती। ये कुछ समय के लिए होती है। बाहरी खूबसूरती का आकर्षण धीरे धीरे समय के साथ कम होता जाता है। क्योंकि लोग अपनी ज़िंदगी में बहुत सारे खूबसूरत लोगों को देखते है। और जैसे ही लोगों को कोई ज्यादा खूबसूरत इंसान  दिखाई देता है लोग सहज ही उसकी ओर आकर्षित हो जाते हैं और पहले वाले से उनका आकर्षण कम होने लगता है।

लेकिन किसी इंसान की आंतरिक सुंदरता लोगों के दिलों में अपनी अलग पहचान बनाती हैं। जो इंसान मन से खूबसूरत है, दिल से खूबसूरत है, उसका आकर्षण कभी कम नहीं होता, हमेशा के लिए होता है। जो लोग दिल से खूबसूरत होते हैं वे लोगों के दिलों पर राज करते हैं। कोई भी इंसान उन्हें छोड़कर जाना नहीं चाहता और अगर किसी भी वजह से छोड़कर चला भी गया तो उस इंसान को कभी भुला नहीं पाता।

मेरी नजर में तन की खूबसूरती से ज्यादा मन की खूबसूरती महत्व रखती है क्योंकि तन की खूबसूरती कुछ दिनों के बाद खो जाती है, जबकि मन की खूबसूरती हमेशा बनी रहती है। मन की खूबसूरती को आप अपने कर्म, स्वभाव और सोच से खूबसूरत बनाते हैं। अगर आपका मन सुंदर है तो तन की खूबसूरती अपने आप बढ़ जाती है।

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इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि मन की सुंदरता शारीरिक सुंदरता से बढ़कर है। आंतरिक सुंदरता से जुड़ा एक प्रसंग मैं आपके सामने पेश कर रहा हूँ।      

सुकरात एक महान यूनानी दार्शनिक थे।  उनको अपने समय का महान दार्शनिक और विद्वान व्यक्ति समझा जाता है। उन्होंने हमेशा सच्चाई और ईमानदारी का साथ दिया और कभी भी किसी के साथ गलत नहीं होने दिया। उनके उपदेश और अनमोल विचार आज भी लोगों को प्रेरित करते हैं। उनसे जुडी एक घटना का जिक्र मैं आपके सामने कर रहा हूँ। 

 सुकरात दिखने में बहुत कुरूप थे। एक बार वो एक कमरे में बैठकर आईना देख रहे थे। इतने में उनका एक शिष्य कमरे में आता  है तो सुकरात को आईना देखते हुए बहुत अजीब सा महसूस करता है और मुस्कुराने लगता है लेकिन शर्म के मारे कुछ भी बोल नहीं पाता। लेकिन सुकरात उसकी मुस्कुराहट का राज समझ गये थे।

जब शिष्य वापस जाने लगा तो सुकरात उससे बोले – मुझे तुम्हारे मुस्कुराने की वजह पता है। तुम शायद इसी लिए मुस्कुरा रहे हो कि मैं तो कुरूप हूँ फिर मुझे आईना देखने की जरुरत क्या है? सुकरात की बात सुनकर शिष्य का सिर शर्म से झुक गया।

फिर सुकरात ने उस से कहा – शायद तुम नहीं जानते  “मैं रोज इसलिए आईना देखता हूँ ताकि मुझे अपनी कुरूपता का आभास हमेशा रहे ” और मैं कोशिश करूँ कि मैं हमेशा इतने अच्छे काम करूँ कि मेरे चेहरे की कुरूपता मेरे अच्छे कामों से ढक जाये।

शिष्य को ये जवाब अच्छा लगा। फिर उसने थोड़ा सहज होकर अपनी शंका व्यक्त करते हुए पूछा कि ” गुरूजी फिर तो इसका मतलब है कि जो लोग सुंदर हैं, उन्हें आईना नहीं देखना चाहिए। ”

इस पर सुकरात ने उसे जवाब दिया कि उन्हें भी हमेशा आईना देखते रहना चाहिए ताकि उन्हें हमेशा ये एहसास रहे कि वो जितने सुंदर दिखते हैं, उसी के अनुरूप वो अच्छे काम भी करें। कभी भी किसी का अहित ना करें, किसी को नुकसान ना पहुंचाएं, किसी के साथ कुछ भी गलत ना करें और कुछ भी ऐसा बुरा काम नहीं करें, जिससे  उनकी सुन्दरता ढक जाये। क्योंकि सूरत से अधिक सीरत की कुरूपता दुखदायी होती है।

तो दोस्तों अपने चेहरे की, अपने शरीर की सुंदरता को बढ़ाने के साथ साथ अपने मन की, अपने दिल की सुंदरता को भी बढ़ाएं।  अपने आपको बाहर से सुन्दर बनाने के साथ साथ अंदर से भी सुन्दर बनायें।  हमेशा दूसरों के साथ जितना भी हो सके अच्छा व्यवहार करें, लोगों से मुस्कुराकर मिलें, लोगों की मदद करें, ज़रूरत में उनके काम आएं, उनकी खुशियों में शामिल हों, और लोगों की भलाई के बारे में सोचें।

कोई भी ऐसा काम ना करें जिससे किसी को दुःख पहुंचे, किसी का नुकसान हो। कभी भी किसी का बुरा ना चाहें और ना किसी के साथ कोई बुरा करें। कभी भी किसी के साथ कुछ गलत ना करें और ना ही किसी के गलत काम में सहयोग करें। किसी को धोखा ना दें। किसी के भरोसे को ना तोड़ें।

सभी लोगों से समान व्यवहार करें। किसी के साथ भी पक्षपात ना करें। किसी को भी धर्म, जाति, अमीरी, गरीबी, रंग, रूप के आधार पर ना देखें बल्कि वो इंसान दिल से कितना सुन्दर है इस आधार पर देखें।  कोई भी ऐसा काम ना करें जिससे आपकी मन की खूबसूरती ढक जाये।  हमेशा ऐसा काम करें जिससे लोग आपको हमेशा याद रखे, आपकी तारीफ करें और आपसे प्रेरणा लें।

अपने आप को इतना अच्छा बना लो कि कोई भी अगर आपसे एक बार मिल जाये तो वो आपसे दूर ना जा सके, आपको कभी भुला ना सके और अगर वो गलती से आपको छोड़ कर या आपसे दूर चला गया तो उसे हमेशा आपको खोने का, आपसे दूर जाने का अफ़सोस रहे।

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8 Comments on चेहरे को नहीं दिल को बनायें खूबसूरत

  1. Bahut accha lekh hai….bahut acchi tarah samjhaya hai aapne…….

  2. Nice post, you have analyzed so good about beauty.

  3. सच कहा आपने कि चेहरे को नहीं दिल को बनाएं खूबसूरत। पर कुछ लोगों के लिए चेहरे की खूबसूरती ही सब कुछ होती है। शायद वह यह नहीं जानते कि दिल की खूबसूरती की बात ही कुछ और होती है।

  4. Bilkul sahi jamshed ji ……Thanks

  5. asutosh gupta ayodhyavasi // December 31, 2016 at 2:09 PM // Reply

    लोगों के हृदय में अच्छाइयों का बीज बोने के लिए आपने समय का बहुत अच्छा सदुपयोग किया है सर।

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