बिना हाथ पैरों के इस शख्स ने हर असंभव चीज को बनाया संभव : निक वुजिसिक

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बिना हाथ पैरों के इस शख्स ने हर असंभव चीज को बनाया संभव : निक  वुजिसिक 

जरा सोचिये (Just imagine) अगर आपका एक हाथ नहीं होता तो क्या होता? और अगर दोनों हाथ नहीं होते तब क्या होता? और अगर एक हाथ और एक पैर नहीं होता तो तब क्या होता? और अगर आपके दोनों हाथ और दोनों पैर भी नहीं होते तो तब आपकी जिन्दगी कैसी होती? ऐसा सोचना ही अपने आप में बहुत भयानक लगता है।

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खैर भगवान करे कि ऐसा किसी के भी साथ ना हों और सभी पूरी तरह से सेहतमंद और खुशहाल रहें। लेकिन एक शख्स ऐसा भी है जिसके जन्म से ही दोनों हाथ और पैर नहीं हैं। यानि कि ये शख्स जन्म से ही बिना हाथ और बिना पैर के है। अब आप अन्दाजा लगाईये कि बिना हाथ और बिना पैरों के जीने में कितनी तकलीफ, कितनी मुश्किल, कितनी बेबसी और ना जाने कदम कदम पर कितनी समस्याओं और चुनौतियों का सामना करना पड़ता होगा।

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लेकिन इस शख्स ने तमाम मुश्किलों, तमाम समस्याओं, बेबसियों को धता बताते हुए पहले खुद अपनी जिन्दगी की इस जंग को जीता, फिर आपने जीने के तरीके में बदलाव किया और आज सारी दुनिया के सोचने और जीने के तरीके को बदल रहा है। और सारी दुनिया के लिए एक प्रेरणास्रोत बन गया है।

इस शख्स का नाम है निक वुजिसिक (Nick Vujicic)। आज निक 34 साल के हैं और मेलबर्न, आस्ट्रेलिया में रहते हैं। निक की कहानी उन लोगों के लिए एक प्रेरणा है, एक मिसाल है जो अपनी जिन्दगी में किसी कमी को लेकर, अपने शरीर की किसी कमी को लेकर, अपनी विकलांगता को लेकर या जिंदगी की मुश्किलों या समस्याओं को लेकर परेशान रहते हैं या अपनी जिंदगी से हार मान लेते हैं, या खुद को असहाय महसूस करते हैं या अपनी जिंदगी, खुद को या भगवान को कोसते रहते हैं

 

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Nick Vujicic

 

आईये निक की प्रेरणादायक जिन्दगी के बार में जानते हैं।

निक का प्रारम्भिक जीवन   

निक वुजिसिक का जन्म 4 दिसम्बर 1982 को मेलबर्न, आस्ट्रेलिया में हुआ था। इनके पिता का नाम Boris Vujicic तथा माता का नाम Dushka Vujicic है। इनकी माँ बच्चों के अस्पताल में नर्स थी। तथा पिता एक Accountant थे। निक का जन्म फोकोमेलिया (Phocomelia) नामक दुर्लभ बीमारी के साथ हुआ था। जिससे उनके जन्म से ही दोनों हाथ और पैर नहीं थे। पैर की जगह उनके कूल्हे पर सिर्फ एक छोटा सा पंजा है। निक के माता पिता ने जब बिना हाथ बिना पैर वाला बच्चा देखा तो वो बुरी तरह हताश हो गये। यहाँ तक कि उनकी माँ ने उन्हें 4 महीने तक गोद में नही लिया। धीरे धीरे उनके माता पिता को समझ आया कि ये बच्चा उनके लिये भगवान की देन है और उन्हें ये ख़ुशी से स्वीकार करना चाहिये। उसके बाद वे निक को प्यार करने लगे।

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निक का बचपन   

निक के लिये उनका बचपन बड़ा ही मुश्किलों भरा था। रोजाना के जरूरी काम, खेलना कूदना, पढ़ाई लिखाई आदि उनके लिये बहुत मुश्किल भरे काम होते थे। स्कूल में बच्चे उनका मजाक उड़ाते थे। उनकी हंसी उड़ाते थे। जिससे वह एक दिन डिप्रेशन में आ गये और 10 साल की उम्र में उन्होंने बाथटब में डूबकर मरने की कोशिश की लेकिन किस्मत से बच गये।

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माता पिता ने बनाया फाइटर

अपने माता पिता की बदौलत ही वह फाइटर बन सके। निक के पिता 18 महीने की उम्र से ही उन्हें पानी में छोड़ देते थे ताकि वह तैरना सीख सकें। 6 साल की उम्र से ही उनके पिता उन्हें पंजे की मदद से टाइप करना सिखाने लगे। उनकी माँ ने प्लास्टिक का एक स्पेशल डिवाइस बनाया जिसकी मदद से उन्होंने पेन और पेन्सिल पकड़ना सीखा और लिखना सीखा। निक के साथ बहुत सी दिक्कतें होने के बावजूद उनके माता पिता ने तय किया कि उन्हें स्पेशल स्कूल नहीं भेजेंगे। इनके माता पिता ने इन्हें सामान्य बच्चों के साथ पढ़ाने का फैसला किया जो काफी मुश्किल भरा था। लेकिन इसी फैसले की वजह से निक ने आम बच्चों की तरह काम करना सीखा। अपने छोटे से पंजे की मदद से ही उन्होंने फुटबॉल और गोल्फ खेलना सीखा, तैरना सीखा। अपने इसी पंजे की मदद से वह अपने शरीर का बैलेंस बनाते हैं, किक मारते हैं, लिखते हैं और कंप्यूटर पर एक मिनट में 43 शब्द की स्पीड से टाइप भी करते हैं। इसी पंजे की मदद से वह ड्रम बजा लेते हैं, fishing कर लेते हैं, पेंटिंग कर लेते हैं, skydiving कर लेते हैं और यहाँ तक कि वे कार भी चला लेते हैं और गियर बदलने के लिए वे अपने मुँह का इस्तेमाल करते हैं।

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एक लेख ने बदली सोच

विकलांग्ता, अकेलेपन और मुश्किलों से लड़ते हुए एक दिन उनकी सोच पूरी तरह बदल गई। तब वह 13 साल के थे। तब अपनी माँ के लिखे एक लेख को पढ़कर उनके जीने का नजरिया बदल गया। यह लेख एक अखबार में प्रकाशित हुआ था जिसमे एक विकलांग व्यक्ति की अपनी विकलांगता से जंग और उस पर जीत की कहानी थी। उस दिन उन्हें समझ में आ गया कि विकलांगता से संघर्ष करने वाले वह अकेले व्यक्ति नहीं हैं।

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“वे बताते हैं कि मुझे महसूस हुआ कि भगवान ने मुझे दूसरों को उम्मीदें देने के लिए ऐसा बनाया है। इस सोच से मुझे प्रेरणा मिली। फिर मैंने दूसरे लोगों का हौसला बढ़ाने और उनकी जिन्दगी में रोशनी भरने को अपनी जिन्दगी का मकसद बना लिया। इसके बाद मैंने तय किया कि जो मेरे पास नहीं हैं, उसका अफ़सोस करने के बजाय मेरे पास जो कुछ है, मैं उसके लिए हमेशा भगवान का शुक्रगुजार रहूँगा।”

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प्रोफेशनल जीवन   

इसके बाद निक ने Positive Attitude पर काम करना शुरू किया और लोगों के साथ अपनी कहानी share करनी शुरू कर दी। इसके बाद उन्होंने school organisations में जाकर public lesson लेना शुरू कर दिया। 17 साल की उम्र में उन्होंने preyer groups में जाकर लेक्चर देना शुरू कर दिया। 19 साल की उम्र से वे एक full time Motivational Speaker बन गये।

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21 साल की उम्र में उन्होंने Accounting & Finance में Graduation कर लिया।

निक ने 2005 में “Life without Limbs” नाम से एक अन्तरराष्ट्रीय NGO बनाया तथा 2007 में ‘Attitude is Attitude’ नाम से एक Motivational speaking कम्पनी बनाई। 2010 में उन्होंने “The Butterfly circus” के नाम से एक short film बनाई जिसके लिये उन्हें Best Actor का Award मिला।

Nick अब तक 44 देशों में 40000 से ज्यादा Motivational Speech दे चुके हैं। उनके speech सुनने के लिये seminar hall  खचाखच भर जाता है।

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निक का परिवार

हाथ पैर ना होने के बावजूद निक शादीशुदा जिन्दगी के लिये पूरी तरह से स्वस्थ हैं। उन्होंने 2012 में कायने मियाहारा से शादी की। उनके कियोशी जेम्स तथा डेजन लेवी नाम के दो बच्चें हैं जो पूरी तरह स्वस्थ हैं। निक और उनकी पत्नी अपनी शादीशुदा जिन्दगी से पूरी तरह सन्तुष्ट और खुश हैं और एक खुशहाल जिन्दगी जी रहें हैं।

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Books and Publications

निक अपने काम और अपने भाषण को टीवी shows और किताबों के जरिये लोगों तक पहुँचाते हैं। उन्होंने कई किताबें लिखी हैं जो इस प्रकार हैं।

  1. Life without Limits : Inspiration of a Ridiculously Good Life in
  2. Your Life without Limits in 2012.
  3. Limitless : Devotions for a Ridiculously Good Life in
  4. Unstoppable : The Incredible Power of Faith in Action in 2013.
  5. The Power of Unstoppable Faith in 2014.
  6. Stand Strong in 2015.
  7. Love without Limits in 2016.

Awards

निक को अपने काम के लिए कई अवार्ड्स भी मिले हैं जो इस प्रकार हैं।

  1. Australian Young Citizen Award in 1990.
  2. Young Australian of the Year in 2005.
  3. Well Done Award through the Kingdom Assignment Organization in 2008.

इसके अलावा निक बहुत से TV Shows में इंटरव्यू दे चुके हैं और बहुत से magazine में उनके लेख पब्लिश हो चुके हैं।

 

बशीर बद्र का ये शेर निक पर बिल्कुल सटीक बैठता है।

“हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है,

जिधर भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जायेगा।”

दोस्तों, विकलांगता अभिशाप नहीं है। दुनियां में कोई परफेक्ट नहीं है कोई ना कोई कमी सभी के अन्दर होती है। इसी तरह कोई ना कोई बबिलियत हर किसी के अन्दर होती है। आपको बस उस काबिलियत को पहचानना है। ईश्वर अगर किसी के अन्दर कोई कमी देता है तो उसे एक ऐसा ख़ास गुण भी देता है जो सबसे अलग होता है। बस जो व्यक्ति अपनी खूबियों को पहचानकर, अपने खास गुण को पहचानकर अपनी कमियों को पछाड़ देता है वही इन्सान दुनिया में कुछ अलग करता है, बुलंदियों को छूता है और इतिहास लिखता है।

तो दोस्तों, जो लोग अपनी जिंदगी में छोटी छोटी बातों से, मुश्किलों से, समस्याओं से परेशान हो जाते हैं, निराश और हताश हो जाते हैं उनके लिए निक की जिंदगी एक जीती जागती प्रेरणा है, एक मिसाल हैं। अगर एक बिना हाथ पैरों वाला शख्स अपनी जिंदगी के रोजाना के काम कर सकता है, बुलंदियों को छू सकता है, एक इतिहास लिख सकता है तो इस दुनिया में ये सब कोई भी कर सकता है। अगर एक बिना हाथ पैरों वाले शख्स के लिए दुनिया की कोई भी चीज असंभव नहीं हैं तो फिर किसी के लिए भी असंभव नहीं है।  

 

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22 Comments

  1. निक ने अपने शारीरिक अभावों पर ध्यान न देकर जिस तरह सकारात्मक जीवन जिया | वो आसान नहीं है | यही बात उन्हें सब से अलग बनाती है और सभी को प्रेरणा देती है | आपने बहुत अच्छा लिखा |

  2. बढ़िया आर्टिकल

    भगवान ने अगर दुनिया में भेजा है तो उसका कोई अपना special काम भी है।

    कमजोरी भी ताकत बन जाती है
    अगर होंसले मजबूत हो।

    कुछ ऐसा ही निक वुजिसिक के साथ है, अपनी कमजोरी को भी उन्होंने अपनी ताकत बना लिया और आज कामयाब है और बहुत से लोगों के जीवन का मार्गदर्शन भी कर रहे है।

  3. बहुत ही बेहतरीन लेख । निक की कहानी वाकई हम सब लोगों के लिए एक प्रेरणा है, एक मिसाल है । आपके जरिए निक के हौसलो के बारे मे पढने को मिला धन्यवाद ।

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